Ticker

6/recent/ticker-posts

बेटी को समर्पित रचना

बेटी को समर्पित रचना 

घर-आँगन की है शान बेटियां हमसब का अभिमान
घर में बेटी की मधुर किलकारी खीचे सबका ध्यान
नन्हे-नन्हे कदम पड़े जब घर-आँगन महकाया
बेटी की मन्द आहट से सबका मन हरसाया ll

मात-पिता प्यारी बेटी जग से है ये न्यारी  
तुतलाती बोली से करदे सुगंध मन की क्यारी   
उछल-कूदकर नाचे गाये ऐसी भोली सूरत 
बेटी से है मान सभी का ऐसी प्यारी मूरत ll

बेटी से है चूड़ी-बिंदी और माथे की रोली
हर थकान मिटाए पिता की ऐसी मीठी बोली 
बेटी है अन्यपूर्णा देवी स्वाद बसे इसके हाथ  
हर व्यंजन लगे मिश्री, भव्या बना इसका साथ ll 

मेरी बेटी बने सहारा करे जीवन खुशहाल
पीहर को अपनों सा करके महकाये ननिहाल
बेटी है जग का गौरव, बेटी से है जग में शान  
बिना बेटी से जीवन अधूरा नहीं रहेगा सम्मान ll 

बेटी नहीं तो बहु नहीं कैसे बनेगी नारी सास 
बेटा की शादी की नहीं होगी किसी की आस 
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, शब्द रखो श्याम यह ध्यान 
बेटी नहीं तो कल नहीं, पुष्पा चेती बनी महान ll

श्याम कुमार कोलारे
चारगांव प्रहलाद,छिंदवाड़ा
मोबाइल 9893573770

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ