देश के स्कूली छात्रो के बहुमुखी विकास के लिए समग्र शिक्षा अभियान को लांच किया गया है जिसमे प्री स्कूल से बारहवीं कक्षा के छात्रो को किताबी ज्ञान के साथ साथ खेलों और स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने की बात की गयी है. स्कूल के कक्षा 1 में आने से पहले बुनियादी अंक पहचान और अक्षर ज्ञान का फायदा बच्चों को स्कूलों में मिलता है तथा समय के साथ उनके सीखने के स्तर में बदलाव तेजी से आता है. इसका विश्लेषण, अभी कुछ दिन पहले जारी असर की रिपोर्ट से निकला जा सकता है !.
बिगत कई सालो से एनुअल स्टेटस ऑफ एडुकेशन रिपोर्ट(असर) के अनुसार निजी स्कूल सरकारी स्कूल से अच्छा प्रदर्शन करते आ रहे, हालाँकि असर 2018 में सरकारी स्कूल के प्रदर्शन असर 2016 की तुलना में अच्छे रहें है फिर भी अभी निजी स्कूलों से पीछे है. असर 2018 के अनुसार कक्षा 3 के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले मात्र 12.3 % बच्चे कक्षा २ के स्तर के पाठ पढ़ सकते है जबकि निजी स्कूल में पढने वाले कक्षा 3 के 45.4 % बच्चे कक्षा २ के स्तर का पाठ पढ़ सकते है. इसका सबसे प्रमुख कारण निजी स्कूलों में प्री प्राइमरी कक्षाओ का संचालन हो सकता है.
असर 2018 रिपोर्ट के अनुसार 5 साल के 32.2 % बच्चें निजी प्री कक्षाओ में पढने जाते है जबकि आँगनवाडी और सरकारी प्री कक्षाओ में मात्र 12.1 % बच्चे पढ़ने जाते है तथा 18.0% बच्चे अभी कही भी पढने नही जाते है. इस तरीके का ट्रेंड हमें 3 साल और 4 साल के बच्चों में भी देखने को मिलता है. इससे यह निष्कर्ष निकला जा सकता है कि कि प्री कक्षाओं का प्रभाव स्कूलों में नामांकित बच्चों के प्रदर्शन पर पड़ता है.
समग्र शिक्षा अभियान की शुरुवात तीन योजनाओ जिसमे सर्वशिक्षा अभियान, माध्यमिक शिक्षा अभियान और टीचर एजुकेशन को मिलाकर किया गया हैं. यह केवल नाम नहीं बल्कि एक नयी सोच है. शिक्षा को हम टुकडो में नहीं देख सकते और टुकड़ो में नहीं बाँट सकते है. हमें प्री प्राइमरी से बारहवी तक के छात्रो को गुणवत्तापरक शिक्षा देनी होगी. असर के आँकडे यही संकेत देते है कि अगर उत्तर प्रदेश को बेहतर प्रदर्शन करना है तो उसे अपने 3, 4, 5 और 6 साल के बच्चों पर विशेष ध्यान देनें की जरुरत है ताकि कक्षा 1 में आने से पहले उनकी अच्छी तैयारी हो सके. इसलिए मेरा मानना है की प्राइवेट स्कूलो के तर्ज पर जल्द से जल्द सरकारी स्कूलों में भी प्री प्राइमरी कक्षाए शुरू करना चाहिए.सचांलित आंगनवाड़ी केन्द्रो को मजबूत करने की जरूरत है ताकि वे प्रभावशाली तरीके से काम कर सके, साथ ही साथ आंगनवाड़ी केन्द्रो को स्कूली शिक्षा से कैसे बेहतर तरीके से जोड़ा सा सक्वे पर काम करने की जरुरत है ।
श्याम कोलारे
0 टिप्पणियाँ