विश्वस्तर पर ‘अर्ली इयर्स’
(0-8 आयु वर्ग)
मानवों के विकास जैसे संज्ञानात्मक विकास, शारीरिक विकास एवं सामाजिक और
भावनात्मक विकास का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना गया है| दुनिया भर में किए गए अनुसंधान यह बताते हैं कि छोटे बच्चों
के उपर्युक्त विकास के लिए प्रारंभिक वर्षों में यदि उनको विकासअनुकूल
वातावरण और उपयुक्त संसाधन मिलें तो बच्चों
को आगे विद्यालय और दैनिक जीवन में
बहुत लाभ होता है | परन्तु अन्य निम्न- एंव मध्य-आय वर्गीय देशों की तरह भारत में भी,
छोटे बच्चों के लिए पूर्व-प्राथमिक विद्यालयो सुविधा, इन विद्यालयों
तक बच्चों की पहुँच, नामांकन की स्थिति व उनके लिए कुछ
महत्वपूर्ण विकासात्मक कौशलों की वृद्धि जो आगे उनके विद्यालय के और दैनिक
जीवन के लिए लाभकारी हैं पर बड़े पैमाने पर प्रमाण बहुत कम उपलब्ध हैं |
हाल ही में मध्यप्रदेश
के 4-8 आयुवर्ग के सतना में रेंडमली चयनित 60 गाँव के 1365 बच्चों और भोपाल में
रेंडमली चयनित 60 गाँव के 1568 बच्चों के सर्वे आधारित एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन
रिपोर्ट (असर) 2019 के आंकड़े बताते
हैं कि 4-8 आयु वर्ग के 90% से अधिक बच्चे किसी प्रकार के शैक्षणिक संस्थान में
नामांकित हैं | कहीं भी नामांकित नहीं है ऐसे बच्चों का अनुपात भोपाल और सतना
में बहुत अधिक है । 4 साल की उम्र में,
भोपाल में 17.9% बच्चे और सतना में 17.2% बच्चे किसी भी तरह के प्री-स्कूल या
स्कूल में नामांकित नहीं हैं । यह आंकड़ा 5 साल की उम्र के लिए भोपाल में 6.5% और
सतना में 7.4% है ।
बच्चों की उम्र और
नामांकन पैटर्न में यह विविधता भी देखी गई की एक ही उम्र के बच्चे विभिन्न प्रकार
के शैक्षणिक संस्थानों में नामांकित हैं | 5 वर्ष के 70% बच्चे आंगनवाड़ियों या पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं में हैं, लेकिन 21.6% बच्चे अभी से
ही विद्यालय में कक्षा 1 में नामांकित हैं | 6 वर्ष के 32.8% बच्चे
आंगनवाड़ियों या पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं में हैं, 46.4% बच्चे कक्षा 1 और 18.7% कक्षा 2 या उससे आगे की
कक्षाओं में हैं | सतना में, 5 साल की उम्र
में, 47.7% बच्चे प्री-स्कूल
में नामांकित हैं, लेकिन Std I में 40.5% बच्चे पहले से ही नामांकित हैं। इन छोटे बच्चों
के बीच भी लड़कों और लड़कियों के नामांकन के पैटर्न अलग दिखाई देते है, जिसमें
लड़के निजी और लड़कियाँ सरकारी संस्थानों में ज़्यादा नामांकित हैं | उम्र के साथ यह
अंतराल और बढ़ता जाता है | 4 और 5 वर्ष के बच्चों में से, 56.8% लड़कियाँ और 50.4% लड़के सरकारी पूर्व-प्राथमिक
या प्राथमिक विद्यालय में नामांकित हैं, जबकि 43.2% लड़कियाँ और 49.6% लड़के निजी
पूर्व-प्राथमिक या प्राथमिक विद्यालय में नामांकित हैं |
राष्ट्रीय शिक्षा नीतियाँ यह
सिफारिश करती हैं कि 4 और 5 आयु वर्ग के बच्चों को पूर्व-प्राथमिक
कक्षाओं में होना चाहिए | इस आयु
में बच्चों को विभिन्न प्रकार के कौशल जैसे संज्ञानात्मक कौशल, सामाजिक और भावनात्मक कौशल के साथ
ही औपचारिक स्कूली शिक्षा के लिए आवश्यक conceptual foundation विकसित करने के लिए
प्रोत्साहित करना चाहिए | 5 वर्ष की आयु में हम बच्चों को जो सीखने का वातावरण
देते हैं और जो उनसे अपेक्षा करते हैं, वह देश के राज्यों में विद्यालय में नामांकन
के नियम अनुसार बहुत भिन्न है | इस कारण से एक 5
वर्ष का बच्चा क्या कर या सीख रहा है यह काफ़ी हद तक उस पर निर्भर है
जहाँ वह रहता है | मध्य प्रदेश के सतना ज़िले में 47.7% बच्चे पूर्व-प्राथमिक विद्यालय में हैं, 40.5% कक्षा 1 में हैं, और 4.1% कक्षा
2 में हैं l बाल विकास विशेषज्ञ
और अनुसंधान यह बताते हैं की 4 से 5 वर्ष में बच्चों में सभी कार्यों को करने की क्षमता में वृद्धि होती है |
असर 2019 के आंकडें भी इसकी पुष्ठी करते हैं | किसी भी
प्रकार के शैक्षणिक संस्थान में नामांकित बच्चे या अनामांकित बच्चे, दोनों में ही,
5 वर्ष के बच्चे संज्ञानात्मक विकास, प्रारंभिक भाषा,
प्रारंभिक गणित और सामाजिक और भावनात्मक विकास के सभी कार्य 4 वर्ष के बच्चों से बेहतर कर पाते हैं | क्योंकि
यह छोटे बच्चे हैं जो अपना अधिकांश समय घर पर बिताते हैं, इसलिए
इनके विकास में अंतर कुछ घरेलू विशेषताओं के कारण हो सकता है | 4-5 आयु वर्ग के उन
बच्चों की आंगनवाड़ियों या सरकारी पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं में नामांकित होने की
संभावना अधिक है जिनकी माताओं ने आठ या उससे कम वर्षों के लिए स्कूली शिक्षा ली है
| इसकी तुलना में 4-5 आयु वर्ग के उन बच्चों की निजी LKG/UKG कक्षाओं में नामांकित
होने की संभावना अधिक है जिनकी माताओं ने आठ वर्षों से अधिक स्कूली शिक्षा पूरी की
है | संज्ञानात्मक कौशल के विकास का प्रभाव बच्चों की प्रारंभिक भाषा और गणित के
कार्यों को करने की क्षमता में भी देखा जा सकता है | इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि
बच्चों को पढ़ाते या सिखाते समय खेल-आधारित गतिविधियों पर ध्यान देने से बच्चों में
सशक्त याद्दाश्त, तार्किक व रचनात्मक सोच, समस्या समाधान जैसे संज्ञानात्मक कौशलों
का विकास होता है जो इस आयु में किताबी/विषय ज्ञान से अधिक लाभकारी है |
कक्षा 1 में नामांकित विभिन्न आयु के बच्चों में भी, बच्चों का संज्ञानात्मक विकास, प्रारंभिक भाषा और गणित एवं सामाजिक और भावनात्मक विकास आयु के साथ बढ़ता है |
बड़े बच्चों का सभी कार्यों पर प्रदर्शन बेहतर दिखाई देता है | भोपाल में, कक्षा 1 में 90% बच्चे शब्द नहीं पढ़
सकते हैं और कक्षा 3 में केवल 25.3% बच्चे
ही कक्षा 1 स्तर का पाठ पढ़ सकते हैं । इसी तरह, सतना में,
कक्षा 1 में 86.4% बच्चे शब्द भी नहीं पढ़ सके और कक्षा 3 में केवल
38.4% बच्चे ही कक्षा 1 स्तर का पाठ पढ़ सकते हैं ।भोपाल में, कक्षा 1 में लगभग 30% बच्चे 2 अंकों की संख्या पहचान कर सकते हैं, जबकि कक्षा 3 में 57.2% बच्चे ही संख्या पहचान कर सकते हैं। सतना में,
यह अनुपात थोड़ा कम है। सतना में कक्षा 1 में 24.3% बच्चे 2 अंकों
की संख्या पहचान कर सकते हैं, जबकि कक्षा 3 में 56.9% बच्चे ही 2 अंको की संख्या पहचान कर सकते
हैं ।
आंगनवाड़ियाँ बहुत बड़े अनुपात में छोटे बच्चों के लिए
पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं में जाने से पहले उन्हें विभिन्न सुविधाएँ उपलब्ध कराती
हैं | इन आंगनवाड़ियों को सभी बच्चों को शामिल करने और 3 और 4 वर्ष के बच्चों के
लिए उपयुक्त स्कूल रेडीनेस गतिविधियों, कार्यक्रम का संचालन करने के लिए और सशक्त बनाना
चाहिए |
श्याम कुमार कोलारे
समाजसेवी, प्रथम भोपाल
993573770
shyamkolare@gmail.com
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