कांस
ऐसा स्कूल हर गाँव में हो और ऐसे समर्पित शिक्षक हर बच्चे को मिले !!
आज
बैतूल जिला के प्रभात पट्टन ब्लाक का एक ऐसा स्कूल देखने के लिए मिला जहाँ स्कूल के
शिक्षक वास्तव में राष्ट्र निर्माता के रूप में देखने को मिले l मुलताई से प्रभात
पट्टन रोड पर मुलताई से लगभग 15 कि.मी. दूरी पर ग्राम गोपालतलाई के शासकीय
प्राथमिक शाला गोपालतलाई है जो मुख्य सड़क से लगा हुआ स्कूल है l इस स्कूल के बारे
में काफी सुना था,इस स्कूल के बच्चे काफी प्रतिभाशाली है, यहाँ के शिक्षक बच्चो को
शिक्षा ही नहीं वल्कि व्यवाहरिक, नैतिक शिक्षा में भी बड़ी कुशलता से देते है l
मैं
मुलताई से प्रभात पट्टन एक काम के जा रहा था l मैंने सोचा ! जब इस रास्ते गुजर ही
रहे है तो क्यों न इस स्कूल को देखा जाये l मन में बड़ा उल्लास कि यहाँ का स्कूल,बच्चे,शिक्षक
कैसे होंगे ? इनसे मिलने की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी l
मैं
मेरे एक साथी नरेन्द्र के साथ स्कूल पहुँचे ; स्कूल में दो शिक्षक श्री हरिभाऊ
चौकीकर जो प्रधान अध्यापक है एवं सहायक शिक्षक अजाबराव देशमुख जी स्कूल के बाहर
मैदान में पेड़ के नीचे बच्चों के बीच बैठे थे l बच्चे बड़े मजे से हँसते हुए शिक्षक
से बातचीत कर रहे थे, वे अपनी कापी में कुछ चेक करा रहे थे l वे बड़ी तल्लीनता से
अपने काम में लगे हुए थे l हम जैसे ही उनके पास गए उनका ध्यान हमारी तरफ गया ;
बच्चो ने खड़े होकर हमारा अभिवादन किया l
शिक्षक
को मैंने अपना परिचय दिया और यहाँ के कारण व अपनी उत्सुकता के बारे में बताया ; यह
सुनकर उन्हें ख़ुशी हुई l मैं शिक्षक से बातचीत करने लगा,और बच्चों की पढाई के विषय
में चर्चा करने लगा , बच्चे अपनी पढ़ाई में तल्लीन थे l कक्षा पहली, दूसरी के बच्चे
एक साथ बैठे थे वे हिन्दी की पुस्तक पढ़ रहे थे l मैंने सुना कुछ बच्चे दो अक्षरों
से बने शब्द बिना रु
के पढ़ रहे थे l
मैंने
शिक्षक अजाबराव देशमुख से बच्चो के बारे में पूछा l उन्होंने बताया हमारे सभी
छात्र नियमित रूप से स्कूल आते है, सभी की उपस्थिति सत प्रतिशत रहती है l बच्चों
के अभिभावक भी बच्चों को बिना कारण के कभी भी घर में नहीं रोकते है l समय-समय पर
अभिभावक को भी स्कूल में बुलाया जाता है एवं बच्चों के पढाई के बिषय में चर्चा
करते है l उन्होंने बताया सभी बच्चे स्कूल में पढाई से साथ कुछ रचनात्मक कार्यों
में भी रूचि रखते है l
“बच्चों
में अनुशासन दूर से ही दिख रहा था l”
मैंने
बच्चों से बात करने की उत्सुकता जाहिर की l शिक्षक ने इसकी स्वीकृति दी l मैंने बच्चों
से चर्चा करना शुरू किया l मैंने बच्चो की ओर इशारा करते हुए पूछा “आपको सबसे अधिक पहाड़े कहाँ तक आते है ; पाँचवी
कक्षा के एक बच्चे ने कहा सर मुझे 22 तक पहाडा आता है l मैंने पूछा ‘अच्छा सबसे कम
पहाडा किसको आता है l एक बच्चे ने कहा सर मुछे 16 तक ही आता है , यह तीसरी कक्षा
का बच्चा था l मैंने सभी को सबसी दी l
शिक्षक
ने बताया कि कक्षा 3 से 5 के बच्चो किसी भी संख्या का पहाडा बना लेते है l शिक्षक
ने बच्चो से कहा- हम आप सभी को पहाडा बनाने के लिए दे रहे है सभी पहाडा बनाइये और
सर को दिखाइए l उन्होंने सभी बच्चो को अलग – अलग संख्या के पहाडा बनाने के लिए दिए,
मैंने भी 3 बच्चो को संख्या दिया ; मैंने 43, 56, एवं 82 का पहाडा बनाने के लिए
दिया l बच्चे तुरंत अलग-अलग स्थानों में जाकर पहाडा बनाने लगे l कुछ ही समय में
सभी पहाडा बनाकर ले आये; कमाल है सभी ने कुछ ही समय एक-दम सही पहाडा बना कर लाये l
मैंने
बच्चों से हिन्दी की पुस्तक पढ़ने के किये कहा ; एक बच्चे में उसकी हिन्दी की
पुस्तक मझे दिया मैने एक पाठ निकलकर दिया l अगले क्षण कक्षा दूसरी का छात्र अक्षित
एवं वैष्णवी ने बगैर रुके धारा प्रवाह में “भेड़िया आया – भेड़िया आया” वाला पाठ
पढ़कर सुनाया l और भी बच्चों ने पढ़ने की इच्छा जाहिर की सभी पढ़कर सुनना चाहते थे l शिक्षक
ने एक छात्रा माही की और इशारा करते हुए बताया यह छात्रा की याददास्त काफी तेज है ,
उसकी एक अद्भुत क्षमता के बारे में पता चला,कि वह जो पढ़ती है उसे याद हो जाता है
उसे पुस्तक की बहुत सी कहानी मौखिक याद है l माही ने अपनी पाठ्यपुस्तक की एक कहानी
सुनाई l मैंने कक्षा चौथी और पाँचवी वाले बच्चों मैंने गणित के विषय में बच्चो से
पूछा कि आपको भाग के सवाल करना आता है; सभी बच्चों ने इसके लिए हामी भरी l अब तक
बच्चे मुझसे काफी हिल-मिल गए थे l बच्चों ने मुझसे कहा - सर हमें भाग का सवाल करने
के लिए दीजिये l मैंने और शिक्षक ने कुछ बच्चों को भाग के सवाल हल करने के लिए दिए
l सभी बच्चों ने कुछ ही समय में हल करके ले आये l कुछ ही समय में यहाँ के बच्चों
ने मेरे मन में स्थान बना लिया था l यहाँ के बच्चे वास्तव में हर एक स्तर पर प्रवीण
थे l
मैंने
देखा गोपालतलाई प्राथमिक स्कूल के कक्षा पहली व दूसरी के सभी बच्चे को शब्द से
अनुच्छेद तक पढ़ना आता है व घटाव तक के सवाल आसानी से हल कर लेते है l वही कक्षा
तीसरी से पाँचवी के सभी बच्चो का हिन्दी में स्तर कहानी व गणित में भाग था l एकिक
नियम के सवाल हो या इबारत बाले सवाल सभी बड़ी आसानी से हल करते है l उनके स्कूल के अन्दर
कक्षा का अवलोकन करने के बाद ऐसा लगा कि वास्तब में इन बच्चो को शिक्षा का सही
माहौल देने के लिए पूर्ण प्रयास किया गया है l स्कूल में बच्चों की मानसिकता के
आधार भरपूर TLM का उपयोग हुआ था l स्कूल परिसर एक
सुव्यवस्थित तरीके से सुसज्जित था l मैंने शिक्षक से बच्चों का इस प्रकार पढाई के
लिए कौशल होने का कारण पूछा , उन्होंने बताया – हमारे स्कूल परिशर के पास ही
आंगनबाड़ी है l आंगनबाड़ी में रोज 5 आयुवर्ग तक के बच्चे आते है l आंगनबाड़ी की
छुट्टी के बाद बच्चे को हम स्कूल में कुछ समय बिठाते है , और यदि स्क्कोल में किसी
के भाई-बहिन है तो उनके साथ ही स्कूल की छुट्टी तक रखते है l इससे बच्चे में पहली
से पहले ही पढने की रूचि बढ़ जाती है और इनके स्कूल में नामांकन से पहले ही कुछ बुनियादी
दक्षता आ जाती है l इससे इन्हें पढ़ाने में आसानी होती है l स्कूल में नामांकन से
पहले ही स्कूल में बच्चों के साथ बैठने,पढ़ने, अनुशासन में रहने आदि के गुण विकशित
हो जाते है , इससे हमें काफी फायदा होता है l मैंने देखा 3-4 आंगनबाड़ी के बच्चे
वहाँ बैठे हुए थे l इसके आलावा सभी बच्चे यहाँ पूर्ण समय पढाई में ही देते है l और
हम बच्चों में पढाई की दक्षता में बढ़ोतरी के लिए हमेशा नवचार करने की कोशिश करते
है l यहाँ उनके मनोकूल उचित वातावरण का
ध्यान देते है l इसका परिणाम है कि बच्चे में स्कूल के प्रति लगाव बढ़ता है और वे
अच्छे से सीखते है l
ये
सब देखकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था l ऐसा स्कूल देखकर मन में गद-गद हो गया , कांस
ऐसा स्कूल हर गाँव में हो और ऐसे ‘राष्ट्र निर्माता’ समर्पित शिक्षक हर बच्चे को मिले !!
श्याम कुमार कोलारे
9893573770,
shyamkolare@gmail.com


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