देश में प्राथमिक शिक्षा की दशा-दिशा का जायज़ा लेने वाली प्रतिष्ठित वार्षिक सर्वेक्षण
रिपोर्ट - असर 2018 आज जारी हो गई | इस वर्ष यह
रिपोर्ट असर के पूर्व कार्यकर्ताओं के हाथों जारी की गई |
असर 2017 में ‘बियॉन्ड बेसिक्स'
के तहत 14 से 18 वर्ष के
किशोर-किशोरियों की उन तैयारियों का जायज़ा लिया गया था जो उन्हें
एक उपयोगी और उत्पादक वयस्क के रूप में तैयार करती हैं | असर
2018 एक बार फिर ग्रामीण भारत में 3 से
16 वर्ष के बच्चों के स्कूल में नामांकन और 5 से
16 वर्ष के बच्चों की पढ़ने व गणित करने की बुनियादी क्षमताओं पर केन्द्रित
है |
शिक्षा क्षेत्र की शीर्षस्थ गैर-व्यावसायिक संस्था 'प्रथम'
द्वारा कराए जाने वाले असर सर्वे को प्रत्येक ग्रामीण जिले में स्थानीय
सहयोगी संस्थाओं के स्वयंसेवी अंजाम देते हैं | हर वर्ष असर में
यह जांच की जाती है कि ग्रामीण भारत के कितने बच्चे स्कूल जा रहे हैं और आसान पाठ पढ़
पाने व बुनियादी गणित करने में कितने सक्षम हैं | 2005, 2007 और 2009 से निरंतर चयनित गांव के एक सरकारी स्कूल का
अवलोकन भी असर सर्वे में शामिल किया गया | शिक्षा का अधिकार अधिनियम
(RTE एक्ट) 2010 के बाद असर सर्वे में उन मापन
योग्य मानकों की पड़ताल को शामिल किया गया जो इस क़ानून के तहत हर विद्यालय के लिए बाध्यकारी
हैं | 2018 में असर सर्वे के तहत ग्रामीण भारत के
15,998 सरकारी स्कूलों का अवलोकन किया गया |
असर 2018 (ग्रामीण) मध्य प्रदेश के मुख्य निष्कर्ष
असर 2018 ग्रामीण मध्य प्रदेश के 50 जिलों तक पहुंचा | इस तरह इसमें कुल मिलाकर
29,961 घरों और 3 से 16 वर्ष
के 48,791 बच्चों का सर्वेक्षण किया गया |
स्कूली स्तर: नामांकन और
उपस्थिति
∙ समग्र नामांकन
(आयुवर्ग 6-14 वर्ष): सन 2007 से अब तक पिछले
10 वर्षों से भी ज्यादा अर्से से स्कूलों में आयुवर्ग 6 से 14 वर्ष के बच्चों के नामांकन का प्रतिशत
95% से ज्यादा रहा है | अनामांकित बच्चों
(आयुवर्ग 6-14 वर्ष) की संख्या
2018 में 4.2% है |
∙ स्कूल से
बाहर लड़कियां: वर्ष 2016 में आयुवर्ग 15 -16 वर्ष की स्कूल न जाने वाली लड़कियों का प्रतिशत 29.8% था
| 2018 में यह प्रतिशत घटकर 26.8% पर आ गया है
| हालाँकि यह रास्ट्रीय औसत 13.5% से अधिक है
|
∙ प्राइवेट स्कूलों में नामांकन:
वर्ष 2006 से 2018 के दौरान प्राइवेट स्कूलों में जाने वाले बच्चों
(आयुवर्ग 6-14 वर्ष) की संख्या
में साल दर साल इजाफ़ा देखा गया | वर्ष 2010 में 6-14 वर्ष आयुवर्ग के 15.4% बच्चे प्राइवेट स्कूलों में नामांकित थे | वर्ष
2018 में यह संख्या लगभग 26.1% हो गई है | हालाँकि यह रास्ट्रीय औसत
30.9% से कम है |
शिक्षक और छात्र उपस्थिति
∙ मध्य प्रदेश में छात्रों की उपस्थिति
अभी भी चिंता जनक है | पिछले कई वर्षों के दौरान प्राथमिक व उच्च
प्राथमिक दोनों तरह के विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति में गिरावट दिखाई देती है
| वर्ष 2010 में प्राथमिक विद्यालयों में
65.9% छात्रों की उपस्थिति की तुलना में वर्ष 2018 में 57.1% उपस्थिति दर्ज की गई है | उच्च प्राथमिक विद्यालयों में यह प्रतिशत 2010 में
67.6% की तुलना में 53.4% दर्ज की गई है
|
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शिक्षकों
की उपस्थिति प्राथमिक व उच्च प्राथमिक दोनों तरह के विद्यालयों में औसतन 85% रही है |
अधिगम स्तर: पढ़ने व
गणित करने के बुनियादी कौशल
पढ़ने की स्थिति: असर टेस्ट से यह पता चलता
है कि अक्षर, शब्द, पहली कक्षा के स्तर
के सरल अनुच्छेद, या कक्षा 2 के स्तर के
पाठ को पढ़ने की क्षमता के लिहाज से कोई बच्चा कहां पर है | यह
टेस्ट 5 से 16 वर्ष की आयु के प्रत्येक
बच्चे को सामने बिठाकर लिया जाता है और उसके प्रदर्शन के उच्चतम स्तर को चिन्हित किया
जाता है |
मध्य प्रदेश में प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने के स्तर में सुधार
∙ कक्षा 3: कक्षा 1 के स्तर के पाठ को आसानी
से पढ़ पाने में सक्षम कक्षा 3 के बच्चों का प्रतिशत पिछले कुछ
वर्षों के दौरान लगातार बढ़ा है | 2016 में यह आंकड़ा
29.4% था जो बढ़कर 2018 में 31% पहुंच गया है |
∙ कक्षा 5: कक्षा 5 में नामांकित बच्चे
जो कक्षा 2 के स्तर के पाठ को पढ़ सकते हैं, यह आंकडा 2016 में 38.7% था जो
2018 में बढ़कर 41.6% पहुंच गया है |
∙ कक्षा 8: कक्षा 8 भारत में अनिवार्य
प्राथमिक स्कूल का अंतिम पड़ाव है | इस स्तर पर बच्चे से यह अपेक्षा
की जाती है कि उसे न केवल बुनियादी कौशलों में महारत हासिल हो बल्कि वह प्राथमिक स्तर
से आगे बढ़ चुका हो | असर 2018 के आंकड़े
बताते हैं कि कक्षा 8 में नामांकित मध्य प्रदेश के लगभग
64.4 % बच्चे कम से कम कक्षा 2 के स्तर का पाठ
पढ़ लेते हैं | यह आंकड़ा 2016 से जस का तस
है |
गणित: असर का गणित टेस्ट से पता चलता है कि बच्चा 1 से 9 तक के अंकों की पहचान
कर पाता है, 10 से 99 तक की संख्याओं की
पहचान कर पाता है, 2 अंकों के हासिल वाले घटाव के सवाल हल कर
लेता है या (3 अंकों में एक अंक के) भाग
के सवालों को सही-सही हल कर लेता है | यह
टेस्ट बारी-बारी से 5 से 16 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे को सामने बिठाकर लिया जाता है और उसके प्रदर्शन
के उच्चतम स्तर को चिन्हित किया जाता है |
मध्य प्रदेश में प्राथमिक कक्षाओं में गणित हल करने की स्थिति
में स्थिरता या मामूली बढोत्तरी दर्ज की गए है |
∙ कक्षा 3: घटाव
के सवालों में हल कर पाने में सक्षम मध्य प्रदेश के तीसरी कक्षा के बच्चों की संख्या
पिछले दो वर्षों से अपरिवर्तनीय है |
2016 में ऐसे बच्चों की संख्या जहां 13.8% थी,
वहीं 2018 में यह 13.9% है
|
∙ कक्षा 5: भाग
के सवाल हल कर पाने में सक्षम कक्षा 5 के बच्चों का प्रतिशत में मामूली बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है | 2016 में ऐसे बच्चों का हिस्सा जहां 19.4% था, वहीं 2018 में यह 19.8% हो गया
| हालाँकि यह रास्ट्रीय औसत 27.9% से कम है
|
∙ कक्षा 8: कक्षा 8 के बच्चों का बुनियादी गणित के प्रदर्शन में
भी पिछले कुछ वर्षों के दौरान बढ़ोत्तरी दिखाई देती है | 3 अंकों
में एक अंक के भाग के सवालों को सही-सही हल कर पाने में सक्षम
हैं, यह 2016 में 33.4% था जो 2018 में बढ़कर 36.6% हो गया
है |
अधिगम स्तर: ‘बियॉन्ड बेसिक्स'
असर 2018 में आयुवर्ग 14 से
16 वर्ष के बच्चों को कुछ ऐसे काम दिए गए जिनमें रोजमर्रा जीवन से जुड़े
हिसाब-किताब की ज़रूरत पड़ती है | बच्चों
को समय बताने, पानी साफ़ करने में लगने वाली गोलियों की गणना करने
(एकिक विधि का उपयोग करने), दो अलग-अलग मूल्य सूचियों के आधार पर किताबों के दाम की गणना करने (वित्त सम्बंधी निर्णय लेने) और वस्तुओं की खरीद में मिलने
वाली छूट की गणना करने को कहा गया | उपरोक्त प्रत्येक काम सामने
बिठाकर करने को कहे गए | इस आयुवर्ग के सिर्फ उन बच्चों के परिणामों
को दर्ज किया गया जो कम से कम घटाव के सवालों को कर पाने में सक्षम थे |
∙ पढ़ने व गणित करने की क्षमता के मामले में आयुवर्ग
14-16 वर्ष
समूह में लैंगिग असमानताएं: आयुवर्ग 14 से 16 वर्ष में कम से कम कक्षा 2 स्तर के पाठ को पढ़ पाने में
सक्षम बच्चों के बीच लड़कियों का प्रतिशत लड़कों की तुलना में थोड़ा कम है | लड़कों में 74.6% की तुलना में लड़कियों का प्रतिशत
70.1% है |
प्रारंभिक गणित में 14 से 16 वर्ष
के बच्चों में जहां 44.5% लड़के भाग के सवालों को सही-सही हल कर लेते हैं, वहीं लड़कियों में यह प्रतिशत
33.6% है | मध्य प्रदेश में इस आयुवर्ग के लड़कों
का प्रदर्शन लड़कियां से बेहतर दिखाई देता हैं |
∙ 'बियॉन्ड बेसिक्स’- बोनस टूल: 14-16 आयुवर्ग में भाग के सवालों को हल कर लेने वालों में आधे से थोड़ा कम बच्चे ही
समय सम्बंधी सवालों को हल कर पाते हैं | 50.8% बच्चे दी गई मात्रा
के पानी को साफ़ करने में लगने वाली गोलियों की संख्या एकिक नियम विधि से निकाल लेते
हैं | 34.9% बच्चे किताबों को खरीदने के सवालों में सही निर्णय
ले सकते हैं, जबकि 23.5% बच्चे ही छूट की
गणना सही-सही कर पाते हैं | इन सभी मामलों
में लड़कों के मुकाबले कहीं कम लड़कियां सवालों का सही जवाब देती पाई गईं |
स्कूलों का अवलोकन
असर सर्वे के हिस्से के तौर पर, प्रत्येक चयनित गांव में प्राथमिक कक्षाओं वाले
एक सरकारी स्कूल का अवलोकन किया जाता है | इस मामले में सरकारी
प्राथमिक विद्यालय (कक्षा 1 से
7/8 तक) को प्राथमिकता दी जाती है |
वर्ष 2018 में असर सर्वेक्षक प्राथमिक कक्षाओं वाले
1451 सरकारी विद्यालयों में पहुंचे | इनमें
922 प्राथमिक विद्यालय और 529 उच्च प्राथमिक विद्यालय
थे |
छोटे स्कूल
∙ मध्य प्रदेश में वर्ष
2018 के सर्वे में अवलोकित 10 सरकारी स्कूलों में
से 5 स्कूलों
में बच्चों की नामांकन संख्या 60 से कम पाई गई | पिछले एक दशक में ऐसे प्राथमिक स्कूलों का प्रतिशत लगातार बढ़ा है |
2010 में यह 17.8% था जो 2014 में बढ़कर
35.8%, 2016 में 40.6% और 2018 में 49.6% हो गया |
स्कूल में सुविधाएं
स्कूली सुविधाओं में लगातार बढ़ोत्तरी दिखाई देती है
∙ शिक्षा का अधिकार अधिनियम
(RTE एक्ट) 2010 में लागू हुआ और इस कानून के प्रावधानों
का लाभ लेने वाले विद्यार्थियों के पहले बैच ने अनिवार्य स्कूली शिक्षा के
8 वर्ष 2018 में पूरे कर लिए हैं | इस कानून के तहत मिलने वाली सुविधाओं की उपलब्धता के लिहाज से प्रदेश में पिछले
आठ वर्षों के दौरान हुए उल्लेखनीय सुधार सर्वत्र देखे जा सकते हैं | लड़कियों के शौचालय उपलब्ध होने वाले स्कूलों का आंकड़ा दो गुना इजाफे के साथ
2018 में 56.5% पर पहुंच गया | चारदीवारी वाले स्कूल बढ़ोतरी के साथ 2018 में
70.2% पर पहुंच गए | पाठ्यपुस्तकों से अन्य पुस्तकों की उपलब्धता वाले
स्कूलों का आंकड़ा भी इसी दौरान 56.3% से बढ़कर 84% पहुँच गया है जो रास्ट्रीय औसत 74.2 % को पार कर गया
है |
शारीरिक शिक्षा और खेल सुविधाएं
इस वर्ष असर सर्वे में खेल-कूद की आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता सम्बंधी सवाल
भी शामिल किए गए थे |
∙ 2018 में सर्वेक्षित 10
में से 8
स्कूलों में बच्चों को स्कूल परिसर के भीतर या निकट खेल का मैदान उपलब्ध
था |
∙ समूचे ग्रामीण मध्य प्रदेश के स्कूलों
में शारीरिक शिक्षा अध्यापक मुश्किल से ही मिलते हैं | सर्वेक्षित
किए गए मात्र 5.5% प्राथमिक विद्यालयों में और 9.6% उच्च प्राथमिक विद्यालयों में ही शारीरिक शिक्षा अध्यापक तैनात पाए गए
| अधिकतर स्कूलों में किसी अन्य शिक्षक को शारीरिक शिक्षा को भी देखने
की ज़िम्मेदारी दी गई है |
∙ 53.5% प्राथमिक और 64.2%
उच्च प्राथमिक विद्यालयों में किसी न किसी प्रकार की खेल सामग्री उपलब्ध
पाई गई |
संकलन
श्याम कुमार कोलारे
shyamkolare@gmail.com
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