प्रदेश की एक चौथाई से अधिक लडकियाँ अभी भी
स्कूलों से बाहर : “निःशुल्क
एवं बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम” 2010 के लागू होने के बाद सरकार ने शिक्षा का
अधिकार सभी तक पहुँचाने का प्रयास किया है l अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करने के
बाद आयुवर्ग 15-16 की 26.8 फीसदी लड़कियाँ स्कूल से बाहर हो जाती है l चूँकि लड़कियों
का स्कूल में ठहराव की संख्या में पिछली सालों की तुलना में मामूली सी कमी आई है, जहाँ 2016 में 29.8 फीसदी लड़कियाँ स्कूल से बहार थी;
वही 2018 में 26.8 फीसदी हो गयी है l यह स्थिति बहुत अच्छी नहीं कही जा सकती है l लड़कियों
की शिक्षा पर सरकार का विशेष ध्यान है फिर भी सरकार बालिका को शालात्याग की स्थिति
से रोकने में असफल दिखाई दे रही है l मध्यप्रदेश में बालिका शिक्षा के लिए किये जा
रहे प्रयासों; जैसे- लाड़ली लक्ष्मी योजना, छात्रवृत्ति योजना, कन्या साक्षरता
प्रोत्साहन, साईकिल वितरण योजना, गाँव की बेटी आदि योजनाये उच्च कक्षाओं में
नामांकन को बढ़ाने में सफल नहीं हो पाया है l इसकी वास्तविक स्थिति का पता लगाकर इस
पर विशेष कार्य करने की आवश्यकता है l
निजी स्कूल, पालकों की पहली पसंद बनते जा
रही है : निजी
स्कूल बच्चों को अपनी तरफ खींचने में लगातार सफल रहे है l साल दरसाल निजी स्कूलों
में बच्चों का नामांकन में बढ़ोतरी दिखाई दे रही है l 2010 से अब तक लगातार निजी
स्कूलों के नामांकन में वृद्धि हुई है, सरकारी स्कूलों की तुलना में प्राइवेट
स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना पलकों की पसंद बनती जा रहा है l
पढ़ाई के स्तर चिंताजनक : प्रदेश में सरकारी
स्कूलों में शिक्षा सुधार को लेकर अनेक प्रयास किये जा रहे है, दक्षता संबर्धन,
प्रतिभा पर्व, कक्षा 1-2 के लिए विशेष अध्यापन, जॉयफुल लर्निंग, शिक्षक प्रशिक्षण
आदि कार्यक्रमों के चलते शिक्षा में सुधार के प्रयास किये गए परन्तु ये सब प्रयास के
बाद भी देखा जाये तो सरकारी स्कूल के कक्षा तीसरी के 10 फीसदी बच्चे ही अपनी कक्षा
से पहले की कक्षा यानि कक्षा दूसरी स्तर का पाठ पढ़ पाते है l यह स्थिति देखकर कहा
जा सकता है हमारा शिक्षा तंत्र ही ऐसा है कि बच्चों को कक्षा से निकलने के बाद 50
फीसदी दक्षता नहीं दे पा रहे है l निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा पूर्ण करने के
बाद भी एक चौथाई बच्चे को कक्षा दूसरी स्तर का पाठ पढ़ना नहीं आता है l ऐसे बच्चे
आगे की कक्षा में केवल दाखिला लेते है आगे की दक्षता हासिल नहीं कर पाते या भी
स्कूल छोड़ देते है l समाज के सभी निर्णायक अधिकारियों, समाज सुधारकों एवं
अभिभावकों को इस मुद्दे पर चिंतन करने की आवश्यकता है l
लेखक :
श्याम कुमार कोलारे (सामाजिक कार्यकर्ता “असर”)
संपर्क :
9893573770
Email : shyamkolare@gmail.com
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