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स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में समुचित सुधार


शिक्षा गुणवत्ता के महत्व पर ज़ोर देते हुए कुछ महीनों पहले देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक उद्बोधन (मन की बात) में कहा थाः "अब तक सरकार का ध्यान देश भर में शिक्षा के प्रसार पर था किंतु अब वक़्त आ गया है कि ध्यान शिक्षा की गुणवत्ता पर दिया जाए। अब सरकार को स्कूलिंग की बजाय ज्ञान पर अधिक ध्यान देना चाहिए।  


"मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी घोषणा की थी कि "देश में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार सर्वोच्च प्राथमिकता होगा।" स्कूलिंग की बजाय ज्ञानार्जन पर ध्यान स्थानांतरित करने का अर्थ इनपुट से नतीजों पर ध्यान देना होगा।
केंद्र सरकार द्वारा कार्यान्वित सर्व शिक्षा अभियान ने आरम्भिक शिक्षा को सर्वव्यापी बनाने में अच्छी सफलता पाई है। मध्यप्रदेश में 2007 से अब तक पिछले 10 वर्षों से भी ज्यादा अर्से से स्कूलों में आयुवर्ग 6 से 14 वर्ष के बच्चों के नामांकन का प्रतिशत 95% से ज्यादा रहा है l एनुअल स्टेटस ऑफ़ एजुकेशन रिपोर्ट 2018 के अनुसार अनामांकित बच्चों (आयुवर्ग 6-14 वर्ष) की संख्या 4.2% है l स्कूल से बाहर लड़कियां: वर्ष 2016 में आयुवर्ग 15 -16 वर्ष की स्कूल न जाने वाली लड़कियों का प्रतिशत 29.8% था l 2018 में यह प्रतिशत घटकर 26.8% पर आ गया है l हालाँकि यह रास्ट्रीय औसत 13.5% से अधिक है l

जैसा कि स्पष्ट है कि सरकार ने स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को सुनिश्चित करने के मामले में अच्छी सफलता पाई है । हालांकि एक औसत छात्र में ज्ञान का स्तर चिंता का विषय अभी भी बना हुआ है। असर 2018 ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश में पांचवी कक्षा के छात्रों से दूसरी कक्षा के स्तर का पाठ पढ़ पाने की समझ से जुड़े प्रश्नों के सही जवाब दे पाने वाले छात्रों का प्रतिशत केवल 41.6% है l यानि पांचवी के आधे के अधिक बच्चे अपनी कक्षा से दो कक्षा पहले के स्तर का पाठ भी नहीं पढ़ पा रहे है l इस प्रकार गणित में साधारण भाग करने वाले बच्चों की संख्या मात्र 19.8% है, राष्ट्रीय आंकड़ो की बात करे तो यह संख्या 27.9% है l 

विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता के स्तर को सुधारने के लिये केंद्र एवं राज्य दोनों सरकारें नवीन व्यापक दृष्टिकोणों एवं रणनीतियों को बना रहे हैं। कुछ विशेष कार्यक्षेत्रों की बात करें तो अध्यापकों, कक्षा कक्ष में अपनाई जाने वाली कार्यविधियों, छात्रों में ज्ञान के मूल्यांकन एवं निर्धारण, विद्यालयी अवसंरचना, विद्यालयी प्रभावशीलता एवं सामाजिक सहभागिता से संबंधित मुद्दों पर कार्य किया जाना है।

बच्चों में ज्ञानार्जन सुनिश्चित करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका एक अध्यापक की होती है। सर्व शिक्षा अभियान की शुरुआत के साथ ही आरम्भिक कक्षाओं के लिए अध्यापकों की नियुक्ति पर विशेष कार्य किया गया है इन पदों के लिये अध्यापकों की नियुक्ति से छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार हुआ है। यद्पि अब भी ऐसे विद्यालय हैं जिनमें अध्यापक केवल एक या उनकी संख्या अपर्याप्त है । इसके लिये राज्य सरकारों को अध्यापकों के एक समान वितरण के लिये नियोजन करने की आवश्यकता है एवं सेवानिवृत्त होने वाले अध्यापकों के स्थान पर दक्ष अध्यापकों की नियुक्ति के लिये कार्ययोजना का सुचारू संचालन होने की आवश्यकता है l

शिक्षक और छात्र उपस्थिति में मध्य प्रदेश में छात्रों की उपस्थिति अभी भी चिंता जनक है | पिछले कई वर्षों के दौरान प्राथमिक व उच्च प्राथमिक दोनों तरह के विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति में गिरावट दिखाई देती है l वर्ष 2010 में प्राथमिक विद्यालयों में 65.9% छात्रों की उपस्थिति की तुलना में वर्ष 2018 में 57.1% उपस्थिति दर्ज की गई है l उच्च प्राथमिक विद्यालयों में यह प्रतिशत 2010 में 67.6% की तुलना में 53.4% दर्ज की गई है l शिक्षकों की उपस्थिति प्राथमिक व उच्च प्राथमिक दोनों तरह के विद्यालयों में औसतन 85% रही है |
ज़रूरत है कि विद्यालयी तंत्र प्रतिभाशाली युवाओं को अध्यापन के क्षेत्र में लाना, राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद ने चार वर्षीय समेकित बीए-बीएड एवं बीएससी-बीएड कार्यक्रमों की शुरुआत की है एवं विद्यालयी तंत्र के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में ईमानदारी से रूचि रखने वालों का ध्यान आकर्षित करने के लिये इन कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार करने की आवश्यकता है।


बच्चों में ज्ञान की समझ विकसित करने, कक्षा कक्ष प्रबंधन, प्रभावी छात्र शिक्षक संवाद, एवं निर्देशों की उत्तमता; अध्यापन एवं सीखने पर ज़ोर देने वाली गतिविधियों के दृष्टिकोण से इन कार्यविधियों का सर्वाधिक महत्व है। इसके लिये छात्रों एवं अध्यापकों की कक्षा कक्ष में नियमित उपस्थिति पूर्वप्रतिबंध है। प्रत्येक कक्षा और प्रत्येक विषय के लिए संभावित शिक्षण परिणामों पर विशेष रूप से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है ताकि यह शिक्षकों, विद्यालय प्रमुखों के द्वारा आसानी से समझा जा सके और इसे माता-पिता और समुदाय के बीच व्यापक रूप से प्रचारित किया जा सके। समझ के साथ पठन के लिए अध्ययन के महत्व पर बल देने के एक प्रारूप के साथ वर्ष 2014 में सरकार के द्वारा शुभारंभ किए गए पढ़े भारत बढ़े भारत हेतु मजबूत बुनियाद की आवश्यकता को स्वीकार किया गया है। गणित, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अध्ययन को रोचक और लोकप्रिय बनाने के क्रम में सरकार ने 2015 में राष्ट्रीय अविष्कार अभियान का शुभारंभ किया। हाल ही में प्रारंभ किए गये अटल अभिनव अभियान और अटल टिंकरिंग लैब से छात्रों के बीच महत्वपूर्ण विश्लेषण, सृजनात्मकता और समस्या को सुलझाने जैसी गतिविधियों को बल मिलेगा। इस पहल के माध्यम से विद्यालयों के पास आईआईटी और एनआईटी जैसे संस्थानों से परामर्शदाता के तौर पर अनुभव प्राप्त करने के अवसर होते हैं। देश के सभी सरकारी माध्यमिक विद्यालयों को आईसीटी से लैस किया जा रहा है ताकि बच्चों को पढ़ाने में आईसीटी का लाभ लिया जा सके और उनमें सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी साक्षरता में भी सुधार किया जा सके।

श्याम कुमार कोलारे 
असर संस्था भोपाल मध्यप्रदेश 

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