सरकार ने पहले 5वीं और 8वीं बोर्ड से हटाई, फिर बोला 9वीं तक फैल मत करो, तो सरकारी स्कूल और ग्रामीण क्षैत्र मे मास्टरों ने पढाना ही बंद कर दिया लास्ट में पास का रिजल्ट बना कर देने लगे!! चाहै बच्चे को कुछ नही आए!!
गांव के अनपढ़ माता -पिता क्या जाने बेचारे??
उन्होंने सोचा हमारा बेटा अच्छे नम्बरो से पास हो रहा है, फिर बच्चा 9वीं में आया तो वह भी पास कर दिया जाता है, फिर 10वीं में आकर फेल होता है तो "रुक जाना नही"योजना चला दी, ताकि यह भी बच्चा फेल न हो और बच्चा कुछ विषय में फेल होता है तो गांव में माँ-बाप क्या जाने ??
बच्चा बोल देता है पिताजी इस बार फिर परीक्षा हो जाएगी और में पास हो जाऊंगा, मेरा साल भी खराब नही होगा, तो पिताजी सोचते है बढीया है बेटा पास तो हो ही जायेगा!!
और अब इस साल बोल दिया की एक विषय में फैल ही नही या जिस विषय मे कम नम्बर है उसे माना ही नही फिर क्या गांव के बच्चे और खुश की अंग्रेजी या गणित में से एक ही विषय पढ़ लेगे तो काम चल जायेगा !!
इस तरह प्राथमिक से लेकर हाईस्कूल तक की शिक्षा बर्बाद कर दी फिर आधे से ज्यादा बच्चे तो जैसे-तैसे 12वीं करने की कोशिश में ही पढ़ाई छोड़ देते है, उनसे 12वीं होती ही नही जो कुछ कर लेते है या "रुक जाना नही" योजना के सहारे निकल जाते हे वो कॉलेज में आकर धक्के खाते है और कुछ बीच में ही पढाई छोड़ कर चले जाते हे!! और कुछ फ़ाइनल कर लेते हे तो नोकरियो के लिए भटकते फिरते हे!! और अंत में उन बूढ़े माँ-बाप का पूरा धन पढ़ाई में लगाकर घर चले जाते हे!! इसमें बच्चे की गलती नही है क्योंकि उसे बचपन से स्वावलंबी होना सिखाया ही नही उसे बचपन में पढ़ाई के अंक का ज्ञान का महत्व बताया ही नही तो उस मिट्टी की नींव पर आप महल बनाओगे तो कैसे बनेगा!!फिर वो बच्चा आज बेरोजगार युवा बन जाता है और आत्महत्या वो करता है या वो गरीब किसान बाप करता है जिसने अपने पूरे जीवन की कमाई उसकी पढ़ाई में झोक दी उसे क्या पता था कि में कच्ची नींव पर महल बनाने के सपने देख रहा हू !!
इसलिए सरकार से निवेदन है की इन बच्चो को बैशाखियों का सहारा ना दे!!
देना है तो आर्थिक मदद दो ताकि हर गरीब का बच्चा पड़ सके!! उससे हुनर में आर्थिक मजबूरिया न आये आपकी छात्रव्रत्ति की योजना 75 प्रतिशत लाने वालो को फ्री शिक्षा ऐसी योजनाओं की हम प्रशंसा करते है ,, लेकिन ये बच्चो को कमजोर करने वाली योजना मत लाइए!!!
5वी और 8वी भी बोर्ड होना चाहिये
जो उम्र (अवस्था) पढ़ने की होती है वह है बालावस्था इसमें लापरवाही नहीं होनी चाहिये
सहमत हो तो शेयर करें ताकि शासन तो बात पहुंचे और आप भी पढ़े और बच्चों को अच्छा पढ़ाया जावे।
श्याम

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