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सरकारी स्कूल के सही मायने

सरकारी स्कूल के सही मायने 
मध्य प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता हेतु सरकारी अमला अपनी पुरजोर कोशिश में लगा है l शिक्षा जैसे मुद्दे में लोग ऐसा ही सोचते है कि शिक्षा का काम तो सरकार का है l जैसे शिक्षा देना केवल सरकार का काम है, अभिभावकों का तो इससे दूर दूर तक कोई लेना देना ही नहीं है l एक बार स्कूल में बच्चा का दाखिला दिला दिया याने बच्चा की पढ़ाई हो गई l 
यही सोच के कारण बच्चों के पढ़ाई का स्तर दिन प्रतिदिन नीचे की ओर आता जा रहा है l बहुत से मत्ता-पिता को अभी ये भी नहीं पता की उसके बच्चे किस कक्षा में पढाई करते है और उसे सही से पढ़ना आता है की नहीं l
प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन द्वारा बच्चों की वर्तमान शिक्षा की स्थिति जानने के लिए हर साल एनुअल स्टेटस ऑफ़ एजुकेशन रिपोर्ट नाम का एक सर्वे होता है l सर्वेक्षण के समय बच्चों के घर में उनके अभिभावक के समक्ष उनसे पढ़ाई व गणित की बुनियादी समझ की जांच की जाती है l जांच के दौरान बच्चों के अभिभावक से बातचीत से पता चलता है की अधिकांश को यही लागता है कि उनके बच्चे स्कूल जाते है यानि उन्हें पढ़ना आता है l पर उनके सामने बच्चों की जाच की गई तब उन्हें पता चाल की उनके बच्चे को तो उनकी कक्षा की दो-तीन कक्षा पहले की पुस्तक पढनी नहीं आती है l अभिभावक सीधी उनके शिक्षक का दोशषबताकर अपनी कन्नी काट लेते है और शिक्षक को इस कमी के कारण दोषारोपण करने लगते है l भैया ! ये बच्चे तो आपके है यदि उन्हें पढ़ना पाचवी या आठवी में पहुचने के बाद पढ़ना या गणित करना नहीं आया तो नुक्सान किसका हुआ ? आपका ही न ! असर 2016 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के कक्षा ३में पढ़ने वाले 8.1% बच्चों को ही धाराप्रवाह में पढ़ना आता है वही केवल 5.5% बच्चे को दो अंक का सरल हासिल वाले घटाव के सवाल हल करना आटा है l कक्षा 5 के 38.7% बच्चे को कक्षा 2 के स्तर का पढ़ पाते है वही 15.3% बच्चे ही सरल भाग का सवाल का पते है l यदि बच्चा को पढ़ना या हिसाब करना नहीं आया ?

बच्चा कमजोर तो आपका ही हुआ l अब आप शिक्षक को कोसोगे  तो उससे आपका बच्चा पढाई में तेज होने वाला नहीं है l शिक्षक आपके बच्चा को पढ़ाए या न पढ़ाए उनको तो तनखाह मिल ही रही है l
सरकारी स्कूल को सरकारी न मानकर यदि उसे अपना स्कूल मानकर लोग पढ़ाई की जिम्मेदारी थोड़ी अपने ऊपर ले लें l बच्चो की पढ़ाई की जानकारी के लिए शिक्षक से कम से कम सप्ताह या महीने में एक बार मिल ले और बच्चे के पढ़ई में बढ़ोतरी के विषय में पूछे , तो निश्चित ही पढ़ाई में सुधार होगा l शिक्षक पढ़ते है या नहीं उन्हें रोज देखने बाला कोई नहीं है , यदि गाँव वाले स्कूल की शिक्षा के बारे में रूचि ले तो शिक्षक भी पढ़ाई में रूचि लेगा और बच्चे भी आपनी पूरी गुणवत्तापूर्ण  शिक्षा हासिल करेंगे l 
 शिक्षा में बढ़ाबा के लिएअभिभावकों समाज को खुलकर शिक्षकों का साथ देना होगा तो वह दिन दूर नहीं है जब हर बच्चा को उसकी कक्षा के अनुसार पढ़ना आ जायेगा l सही मायेने में बच्चों को तभी शिक्षा का सही अधिकार मिल पायेगा l

श्याम कुमार कोलारे ( स्वतंत्र लेखक/ समाज सेवक )
मोबाइल :9893573770
Email : shyamkolare@gmail.com

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