मध्यप्रदेश में बुनियादी शिक्षा का वास्तविक दर्पण
एनुअल स्टेटस ऑफ़
एजुकेशन रिपोर्ट, असर 2016 जो असर की ग्यारहवी वार्षिक
रिपोर्ट है l असर ग्रामीण भारत में स्कूली शिक्षा और बुनियादी
शिक्षण पर केन्द्रित बच्चों का सबसे बड़ा परिवार आधारित वार्षिक सर्वेक्षण है l
प्रथम द्वारा प्रायोजित और प्रत्येक ग्रामीण जिले में होने वाला यह सर्वे वस्तुतः स्थानीय
संगठनों व संस्थाओं द्वारा संपन्न किया जाता है l इस वर्ष मध्यप्रदेश में असर 2016 की पहुंच 50 जिलों और 1497 गांवों तक रही तथा
इसमें करीब 29967 परिवारों के 3-16 आयुवर्ग के 52540 बच्चों को सर्वेक्षण में
शामिल किया गया l
असर 2016: प्रमुख निष्कर्ष
वर्ष 2016 में मध्यप्रदेश के स्कूलों में 6-14
आयुवर्ग के बच्चों के नामांकन 95.6% है , लेकिन अभी भी 4.4% बच्चों स्कूलों से
वंचित हैं l
· राष्ट्रीय स्तर पर, स्कूल नहीं जाने वाले 6-14
आयुवर्ग के बच्चों का प्रतिशत 3.1% है l पिछले वर्ष भी यह इतना ही था, किन्तु
मध्यप्रदेश में 2014 की तुलना में स्कूल नहीं जाने बच्चों की संख्या में मामूली बढ़ोतरी
हुई है l
· 2010 से लगातार स्कूलों से बाहर 11-14 आयुवर्ग
के बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है l
· हालांकि शिक्षा का अधिकार कानून के अंतर्गत आने
वाले बच्चों (6-14 आयुवर्ग) के नामांकन की दर बहुत ऊंची है, परन्तु 15-16 वर्ष के अनामांकित बच्चों की संख्या
अच्छी-खासी है l प्रदेश स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में इस आयुवर्ग के 21.2% लड़के
और 29.8% लड़कियां स्कूल से बाहर हैं l
प्राइवेट स्कूलों में लगातार बढ़ रहा है नामांकन
· वर्ष 2016 में, ग्रामीण क्षेत्रों के 6-14
आयुवर्ग के 2010 में 15.4% बच्चे प्राइवेट स्कूलों में नामांकित थे जो की 2016 में
बढकर लगभग 24.7% हो गया हैं l
· पिछले वर्षों की तरह, प्रत्येक आयुवर्ग में,
प्राइवेट स्कूलों में जाने वाले लड़कों की संख्या लड़कियों की तुलना में ज्यादा रही
है l 2016 में 7-10 आयुवर्ग के लगभग 31.9% लड़कों का नामांकन प्राइवेट स्कूलों में
हैं, जबकि लड़कियों में यह प्रतिशत मात्र 24% है l 11-14 आयुवर्ग में 16.7% लड़कियों
के मुकाबले 23.9% लड़के प्राइवेट स्कूलों में नामांकित हैं l
पढ़ने के स्तर
(रीडिंग लेवल)
· पिछले कुछ वर्षों की तुलना में पढ़ने के स्तर में
थोड़ा सुधार हुआ है, उदाहरण के लिए, कक्षा 5 में कक्षा 2 के स्तर का पाठ पढ़ लेने
वाले बच्चों की संख्या 2014 में 34.1% थी जो बढकर 2016 में 38.7 तक हो गई है l
वर्ष 2014 में कक्षा 3 के 24.7% बच्चे कक्षा 1 के स्तर का पाठ पढ़ पाने में सक्षम
थे l वर्ष 2016 में यह संख्या बढ़कर 29.4% तक पहुंच पाई है l
· कक्षा 1 में अक्षर नहीं पहचानने वाले बच्चे की संख्या
60.5% (2014) से घटकर 52.8% (2016) रह गई है | इसी प्रकार कक्षा 2 में वर्ष 2014
में यह आंकड़ा 33.4% था जो 2016 में घटकर 27.7% हो गया है l साथ ही अन्य स्तरों में
भी सुधारात्मक परिवर्तन हुआ है l
· कुछ राज्यों में पढ़ पाने की क्षमता में पिछले
साल की तुलना में सुधार दिखाई देता है. उदाहरण के लिए, वर्ष 2016 में महाराष्ट्र,
गुजरात , राजस्थान, झारखण्ड , छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में पिछले वर्ष के मुकाबले
कक्षा 5 के ऐसे बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ है जो कक्षा 2 के स्तर का पाठ
आसानी से पढ़ लेते हैं l
· 2014 की तुलना में देखें तो कई राज्यों में
बच्चों की पढ़ने की क्षमता का स्तर यथावत है या कम हुआ है l फिर भी, कुछ राज्यों
में, जैसे- बिहार, उत्तरप्रदेश, ओड़िशा और कर्नाटक में पिछले वर्षों के दौरान पढ़
पाने में सक्षम बच्चों की संख्या में स्पष्ट गिरावट दिखाई देती है l
गणित के स्तर
· प्रारंभिक गणित सम्बंधी आकड़ों में पिछले वर्षों की
तुलना में अल्प सुधार देखा गया है l वर्ष 2014 में कक्षा 3 के 10.8% बच्चे दो
अंकों का घटाव के सवाल हल कर पा रहे थे l वर्ष 2016 में यह संख्या बढ़कर 13.8% है l
कक्षा 5 के बच्चों में, घटाव के सवाल कर पाने वाले बच्चों की संख्या 2014 में 31%
से बढ़कर 2016 में 38.5% हो गयी है l
· कक्षा 1 में 1-9 तक के अंक नहीं पहचानने वाले बच्चे
की संख्या 57.3% (2014) से घटकर 49.0% (2016) रह गई है , इसी प्रकार कक्षा 2 में वर्ष 2014 में यह आंकड़ा 29.4% था जो
2016 में घटकर 23.2 % हो गया है l साथ ही अन्य स्तरों में भी सुधारात्मक परिवर्तन
हुआ है l
· इसी तरह, भाग के सवाल हल कर पाने में सक्षम
कक्षा 8 के बच्चों की संख्या वर्ष 2010 से लगातार घट रही थी l तीन अंकों की संख्या
में एक अंक की संख्या का भाग दे पाने में सक्षम कक्षा 8 के बच्चों की संख्या वर्ष
2014 में 30.3% थी, यह संख्या वर्ष 2016 में बढ़कर 33.4% हुआ है l
· पिछले वर्ष की तुलना में थोड़े सुधारात्मक परिवर्तन
दृष्टिगोचर होते हैं तथापि, पांच से आठ वर्ष के अंतराल पर नज़र डालें तो यह स्पष्ट दिख
रहा था कि लगभग हर राज्य में गणित के स्तर में गिरावट आई थी l
शुरुवाती प्राथमिक कक्षाओं में अंग्रेज़ी पढ़ पाने की क्षमता
की स्थिति
प्रारंभिक अग्रेज़ी सम्बंधी मूल्यांकन 2007, 2009, 2012,
2014 और 2016 में किया गया है l
· निचली प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों की अंग्रेज़ी
पढ़ पाने की क्षमता तुलनात्मक रूप से जस की तस बनी बनी हुई है l वर्ष 2016 में
कक्षा 5 में नामांकित लगभग 12.6% बच्चे ही अंग्रेज़ी के सरल वाक्यों को पढ़ पाते हैं
l यह आंकड़ा वर्ष 2014 में 9.6% था जो की 2016 से थोड़ा सा बढकर दिख रहा है l
· उच्च प्राथमिक कक्षाओं में वर्ष 2014 में, कक्षा
8 के 24.3% बच्चे सरल वाक्यों को पढ़ पाते थे l लेकिन 2016 में यह आंकड़ा 26.7% पर
है l लगभग स्थिति यथावत बनी हुई है l
· कक्षा 5 व 8 के जो बच्चें सरल वाक्यों को पढ़
पाते है उनमे से करीब आधे बच्चें ही उन वाक्यों का अर्थ पाते है l
स्कूल अवलोकन (
छात्र-शिक्षक उपस्थित )
असर 2016 में प्राइमरी सेक्शन वाले 1457 सरकारी
स्कूलों को सर्वेक्षण में शामिल किया गया है l इनमें 1084 प्राइमरी और 373 ऐसे अपर
प्राइमरी स्कूल हैं, जिनमें प्राइमरी
कक्षाएं भी लगती हैं l
पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष शिक्षकों व
बच्चों की उपस्थिति की स्थिति में ख़ास बदलाव नहीं दिखाई देता l
· वर्ष 2016 में असर के आंकड़े बताते हैं कि
प्राइमरी स्कूलों के कुल नामांकित बच्चों में 58.5% और अपर प्राइमरी स्कूलों में 54.8%
बच्चे सर्वेक्षण के दिन उपस्थित थे l वर्ष 2014 में ये आंकड़े क्रमशः 62.5% और 57.5%
थे l
· समय के साथ रुझान बताते हैं कि वर्ष 2010 में
प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूल दोनों में बच्चों की उपस्थिति की स्थिति 2016 के
मुकाबले बेहतर थी l वर्ष 2010 में प्राइमरी स्कूलों में उपस्थिति 65.9% और अपर
प्राइमरी स्कूलों में 67.6% थी l
· वर्ष 2010 से शिक्षकों की उपस्थिति में मामूली
गिरावट दिखाई दे रही है l वर्ष 2016 में प्राइमरी स्कूलों में सर्वेक्षण के दिन 83.5%
शिक्षक स्कूल में उपस्थित थे l वर्ष 2010 में यह आंकड़ा 88.5% था l अपर प्राइमरी
स्कूलों के लिए वर्ष 2016 शिक्षक उपस्थिति दर 82.2% रही जबकि वर्ष 2010 में यह 87.1%
थी l
सरकारी प्राइमरी स्कूलों में "छोटे स्कूलों"
की तादाद लगातार बढ़ रही है
· वर्ष 2016 में सर्वेक्षित सरकारी प्राइमरी
स्कूलों में 40.7% "छोटे स्कूल" की श्रेणी में गिने जा सकते हैं, जहां
कुल नामांकन संख्या 60 या इससे कम है l
· वर्ष 2010 में सर्वेक्षित सरकारी प्राइमरी
स्कूलों "छोटे" स्कूलों की संख्या 17.8% थी l
स्कूल में सुविधाएँ
· पेयजल के प्रावधान और उपलब्धता के सन्दर्भ में
सर्वेक्षित 73% स्कूलों में पेयजल उपलब्ध था l वर्ष 2014 में यह आंकड़ा 75.3% था l
· असर ने यह देखने की भी कोशिश की कि क्या स्कूल
दौरे के दिन स्कूल में इस्तेमाल योग्य शौचालय था या नहीं l वर्ष 2010 से इस्तेमाल करने
योग्य शौचालयों की संख्या में लगातार सुधार दिखाई देता है l प्रदेश स्तर पर देखें
तो वर्ष 2016 में 58.5% स्कूलों में इस्तेमाल करने योग्य शौचालय पाए गए l वर्ष 2014 में यह आंकड़ा 55.1%
और वर्ष 2012 में 46.7% था l
· लड़कियों के लिए इस्तेमाल करने योग्य शौचालय की
मौजूदगी वर्ष 2012 में 34.4% थी, जो वर्ष 2014 में बढ़कर 40.3% और वर्ष 2016 में 45.9%
हो गयी l
· आरटीई निर्देशित सुविधाओं में रसोई, शौचालय आदि
के मामले में साल दर साल प्रगति दिखाई देती है l
· सर्वेक्षित स्कूलों में कम्प्यूटर की उपलब्धता
की स्थिति में लगातार गिरावट दिखाई देती है l वर्ष 2016 में यह 97.5% स्कूलों में कम्प्यूटर
की उपलब्धता नहीं थी , जबकि वर्ष 2012 में यह आकड़ा 92.8% था l
· इसी तरह पुस्तकालय वाले स्कूलों की संख्या में
भी पिछले वर्षों की तुलना में सुधार यथावत है l वर्ष 2014 में यह संख्या 40.3% थी
जो वर्ष 2016 में 39.4% हो गई है l सर्वेक्षण के दिन पुस्तकालय की पुस्तकों का
प्रयोग करने वाले बच्चों की संख्या वर्ष 2016 में 40% हो गई है l
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श्याम कुमार कोलारे (भोपाल )
shyamkolare@gmail.com
Mob: 9893573770
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