सरकारी स्कूल के बच्चों की कमजोर शिक्षा
सरकार नि:शुल्क शिक्षा अधिकार क़ानून ने बच्चों को पढ़ने का अधिकार तो दिलवा दिया है पर क्या बच्चे सचमुच पढ़ रहे हैं ?यह प्रश्न बहुत प्रासंगिक है। इसलिए कि अशासकीय संगठन 'प्रथम' के वार्षिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2016 मध्यप्रदेश में ग्रामीण ज़िलों के प्राथमिक स्तर की शिक्षा की जो स्थिति उजागर हुई है उससे स्पष्ट है कि कागज़ पर विद्यालयों में बच्चों की संख्या अवश्य बढ़ी है, परन्तु वे पढ़ाई से कोसों दूर हैं। एनुअल स्टेटस ऑफ़ एजुकेशन रिपोर्ट 2016 द्वारा जारी आकड़ो से यह खुलासा होता है कि मध्यप्रदेश के 50 ज़िलों के 1497 गांवों पर आधारित है। इसमें 29967 परिवारों के 3 से 16 वर्ष उम्र समूह के 52540 बच्चों से संवाद किया गया। इस दौरान 'असर स्वयंसेवकों' की टीम ने लगभग 1457 शासकीय विद्यालयों का अवलोकन भी किया।
सरकार नि:शुल्क शिक्षा अधिकार क़ानून ने बच्चों को पढ़ने का अधिकार तो दिलवा दिया है पर क्या बच्चे सचमुच पढ़ रहे हैं ?यह प्रश्न बहुत प्रासंगिक है। इसलिए कि अशासकीय संगठन 'प्रथम' के वार्षिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2016 मध्यप्रदेश में ग्रामीण ज़िलों के प्राथमिक स्तर की शिक्षा की जो स्थिति उजागर हुई है उससे स्पष्ट है कि कागज़ पर विद्यालयों में बच्चों की संख्या अवश्य बढ़ी है, परन्तु वे पढ़ाई से कोसों दूर हैं। एनुअल स्टेटस ऑफ़ एजुकेशन रिपोर्ट 2016 द्वारा जारी आकड़ो से यह खुलासा होता है कि मध्यप्रदेश के 50 ज़िलों के 1497 गांवों पर आधारित है। इसमें 29967 परिवारों के 3 से 16 वर्ष उम्र समूह के 52540 बच्चों से संवाद किया गया। इस दौरान 'असर स्वयंसेवकों' की टीम ने लगभग 1457 शासकीय विद्यालयों का अवलोकन भी किया।
ज्ञातव्य है कि माता-पिता का
आकर्षण निजी विद्यालयों की ओर बढ़ा है। 6 से 14
वर्ष उम्र समूह के 95.6 प्रतिशत बच्चों ने
विद्यालयों में प्रवेश लिया। निजी विद्यालयों में दाखिले में 10 प्रतिशत की वृध्दि दर्ज की गई। यही स्थिति रही तो वर्ष 2000 तक देश के आधो से अधिक बच्चे निजी विद्यालयों में दिखेंगे। जबकि 15 से 16 वर्ष उम्र समूह की 30 प्रतिशत लड़कियां विद्यालय नहीं जाती है । विडम्बना यह भी है कि शासकीय
विद्यालयों में बच्चे मध्यान्ह भोजन के आकर्षण के कारण उपस्थित रहते भी हों तो
पोषण की दृष्टि से यह ठीक है। मगर पढ़ाई के नज़रिये से देखे तो सरकारी और निजी
विद्यालयों में पढ़ने वाले पहली कक्षा के 59 प्रतिशत से अधिक
बच्चे अंग्रेजी का एक अक्षर भी पढ़ नहीं सकते। 50 प्रतिशत से
अधिक बच्चों को किसी भी भाषा का ज्ञान नहीं है। वे न अक्षर पहचानते हैं, न ही शब्द। तीसरी कक्षा के भी 29.4 प्रतिशत बच्चे ही
पहली कक्षा की पुस्तकें पढ़ सकते हैं। पांचवी कक्षा के बच्चों का ये हाल है कि 61.3 प्रतिशत बच्चे दूसरी कक्षा की पुस्तक तक नहीं पढ़ पाते, सरकारी विद्यालयों
में तो ऐसे 59.4 प्रतिशत बच्चे हैं। पांचवी कक्षा के लगभग 61.5 प्रतिशत बच्चों को गणित में दो अंकों की संख्या को घटाना नहीं आता और लगभग
80.6 प्रतिशत बच्चों को भाग देना नहीं आता। मतलब यह कि शिक्षा
में सुधार की सरकारी कवायद के बावजूद बच्चों के शैक्षणिक स्तर में निरंतर गिरावट आ
रही है । पिछली वर्ष की तुलना में थोडा सुधर तो हुआ है परन्तु इसमें कोई विशेष वदलाव नहीं दिंखाई दे रहे है l
श्याम कुमार कोलारे
मोबाइल न- 9893573770, Email ID : shyamkolare@gmail.com
blog source : http://img.asercentre.org/docs/Publications/ASER%20Reports/ASER%202016/State%20pages%20Hindi/madhyapradesh_state_hindi.pdf

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