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सरकारी स्कूल के बेबस बच्चें !!

सरकारी स्कूल के बेबस बच्चें !!

आज शहर हो या गाँव निजी स्कूलों नें बच्चों को पढ़ाने की जैसे होड़ लगी हुई है ! आज सभी अभिभावक निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए मोती से मोटी रकम तक चुकाने के लिए तैयार हो जाते है l आज सभी लोगो को लगता है कि केवल निजी स्कूलों में पढ़ाई किया हुआ बच्चा ही अच्छी नौकरी और उंचे ओहदे तक पहुचते है l आखिर हो भी क्यों न जिस स्कूलों मैं केवल धनी व्यक्ति आपने पैसे की शक्ति से बच्चों को उन्च्ची से ऊँची तालीम दिला लेते है l पर क्या गरीबो के बच्चे यानि जो माता-पिता निजी स्कूलों की मोटी रकम नहीं भर सकते वह क्या डॉक्टर,इंजिनियरिंग , वैज्ञानिक नहीं बन सकते l कटु सत्य कुछ इसी प्रकार से देखने की लिए मिल रहा है , शिक्षा समान होनी चाहिए l सभी को पढ़ने का एक समान मौका व वातावरण मिलना चाहिए l 

इस कड़ी में सरकारों के तमाम कोशिशे अभी तक कोई कारगर उपाय नहीं कर पी है l आज इस प्रकार की प्रतिस्पर्धा में सभी चाहते है की आपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढाई कराये, पर निजी स्कूलों की मोटी फीस चुकाने में देश का हर अभिभावक तो सक्षम नहीं है l इसीलिए उंचे पदों पर उन लोगो के बच्चें ही पंहुच पते है जो पहले से ही ऊँचे पदों पर अपने पैर जमाये हुए है l आज छोटे किसान के बेटे को किसानी ही हाथ लगती है , ज्यादा से ज्यादा तृतीय/चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक का शौभाग्य मिलता है l आगे की सोच केवल उनके लिए सपना होती है l

आखिर येसा क्यों है कि लोगों की मानसिकता सरकारी की अपेक्षा निजी स्कूलों की तरफ बढ़ रही है l प्रथम नामक संस्था द्वारा शिक्षा की वार्षिक रिपोर्ट ‘’ एनुअल स्टेटस ऑफ़ एजुकेशन रिपोर्ट 2016 के आधार पर प्रदेश की बुनियादी शिक्षा की हालत बहुत ही दयनीय है l मध्यप्रदेश में शिक्षा की स्थिति को दर्शाती यह रिपोर्ट से पता चलता है कि निजी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 5 के बच्चे जो कक्षा 2 स्तर का पाठ पढ़ सकते है, 2016 में एसे बच्चों का प्रतिशत 63.3 है वही सरकारी स्कूलों के बच्चों का प्रतिशत 31.3 है l स्थिति हमारे सामने है सरकारी स्कूलों में कक्षा 5 के लगभग 70% बच्चें कक्षा 2 स्तर का पाठ भी नहीं पढ़ पा रहे है , तो अभिभावक आपने बच्चों की शिक्षा का जिम्मा एसे हाथों में क्यों सौपना चाहेगा जंहा शिक्षा के नाम पर केवल कक्षा में बढ़ोतरी होती जा रही है शिक्षा कौशल की बात करे तो हसिलाय शून्य l क्या गरीबो के लिए शिक्षा का सही मायना यही है ? सोचना हो सर्कार को और साथ देना हो सम्माज को तभी बच्चों को मिलेगा शिक्षा का सही अधिकार l

( यह लेखक के व्यक्तिगत विचार है )

लेखक : श्याम कुमार कोलारे

ईमेल : shyamkolare@gmail.com      

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