स्कूली
शिक्षा में गुणवत्ता के साथ शैक्षिक सुधार की सफल मुहिम
मध्यप्रदेश सरकार का
पूरा ध्यान स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता के साथ ही शैक्षिक सुधार की ओर भी है। वर्ष 2014-15 के शैक्षिक सत्र को गुणवत्ता वर्ष के रूप में
मनाकर अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाये गये हैं। शासकीय विद्यालयों में पर्याप्त संख्या
में शिक्षकों की व्यवस्था के साथ ही नवाचारों को अपनाया गया। पिछले वर्षों से
लगातार 'स्कूल चलें हम' अभियान का
संचालन कर शाला जाने से वंचित बच्चों को प्रवेश दिलवाया जा रहा है। यह अभियान चार
चरण में संचालित किया गया है।
अभियान का मुख्य उद्देश्य शैक्षिक गुणवत्ता के साथ ही शिक्षक एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति, गुणवत्तायुक्त अध्यापन और शालाओं के समग्र मूल्यांकन के लिये प्रतिभा-पर्व और पुस्तकोत्सव जैसे आयोजन हैं। स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा उनकी कमी की पूर्ति के लिये पिछले शैक्षिक सत्र में 42 हजार 88 संविदा शाला शिक्षक की नियुक्ति ऑनलाइन पद्धति और पारदर्शिता से की गयी। अभी लगभग 39 हजार अतिरिक्त संविदा शाला शिक्षक की नियुक्ति की कार्यवाही चल रही है। बच्चों द्वारा सीखने की प्रक्रिया की समझ बढ़ाने के लिये शिक्षक प्रशिक्षकों को हैदराबाद में प्रशिक्षण दिलवाया गया। शिक्षकों के क्षमता संवर्द्धन के लिये लखनऊ एवं इंदौर के आईआईएम तथा मसूरी के एलबीएसएनएए जैसे संस्थान में प्रशिक्षण आयोजित किये गये। शिक्षा में सुधार की दृष्टि से जिले में अकादमिक गुणवत्ता सुधार योजना लागू की गयी। इसके लिये 16 हजार से ज्यादा प्राथमिक शाला में गतिविधि आधारित शिक्षण तथा 14 हजार 280 माध्यमिक शाला में सक्रिय अधिगम प्रविधि कार्यक्रम चलाया गया। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के संदर्भ में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की व्यवस्था लागू की गयी है। शिक्षकों को सेवाकालीन प्रशिक्षण के लिये आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण की व्यवस्था है। इसके लिये फीडबेक, सर्वेक्षण आदि के आधार पर चिन्हांकित कठिन अवधारणाओं के मोनोग्राफ विकसित किये गये हैं। विद्यार्थियों की उत्तर-पुस्तिकाओं की जाँच और त्रुटि-सुधार पर शिक्षकों द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुसार मध्यप्रदेश की शालाओं में बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय बनाये जा रहे हैं। लगभग 58 हजार शौचालय के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। भारत सरकार के विभिन्न सार्वजनिक उपक्रम द्वारा लगभग 20 हजार शौचालय के निर्माण में सहभागिता की जा रही है। शेष का निर्माण भी सांसद, विधायक एवं राज्य तथा केन्द्र के उपक्रमों के सहयोग से किया जायेगा। प्रदेश में कुल एक लाख 21 हजार 693 शाला हैं। प्रदेश में इस साल 484 हाई स्कूल खोले जायेंगे। सरकार ने 201 विकासखण्ड में छठवीं से बारहवीं तक के लिये मॉडल स्कूल स्वीकृत किये हैं। स्वीकृत स्कूलों के लिये पदों की पूर्ति की जा रही है। राष्ट्रीय माध्यमिक शाला अभियान एवं मॉडल स्कूलों के अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिये 1700 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गयी है। इसके अलावा अपूर्ण कार्यों को पूरा करने के लिये माध्यमिक शिक्षा मण्डल एवं ओपन स्कूल को 50-50 करोड़ और संस्कृत बोर्ड को 44 करोड़ स्वीकृत किये गये हैं। गुणवत्ता सुधार के लिये ब्रिटिश काउंसिल द्वारा उज्जैन संभाग एवं सीहोर की प्राथमिक शालाओं के 24 हजार शिक्षक को अंग्रेजी भाषा का प्रशिक्षण दिया गया है। एनआईडी अहमदाबाद द्वारा पाठ्य-पुस्तकों की री-डिजायनिंग का कार्य किया गया है। एक परिसर के समस्त विद्यालय का एकीकरण कर शालाओं के डाइस कोड पूर्ववत रखे गये हैं। प्रदेश में 9 विभाग की 30 प्रकार की छात्रवृत्ति को ऑनलाइन स्वीकृत कर वितरित करने का बहुत बड़ा कार्य हाथ में लिया गया है। समग्र छात्रवृत्ति योजना में अब तक एक करोड़ 64 लाख 78 हजार 956 (103.70 प्रतिशत) विद्यार्थियों की मेपिंग कर 76 लाख 5 हजार 247 (102.34 प्रतिशत) की छात्रवृत्ति स्वीकृत की गयी है। शिक्षकों की ई-अटेंडेंस एप्लीकेशन योजना इंदौर संभाग में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस एप्लीकेशन योजना की सफलता को देखते हुए इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है। विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति प्रोत्साहित करने की इंस्पायर अवार्ड योजना में चयनित पाँच विद्यार्थी ने जापान का शैक्षणिक भ्रमण किया है। स्कूली शिक्षा में पारदर्शिता अपनाते हुए पदोन्नति बाद नियुक्ति, संविदा भर्ती एवं संविलियन की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है। स्कूलों की मान्यता की पूरी कार्यवाही इस साल से ऑनलाइन की जा रही है। बोर्ड परीक्षाओं के पर्यवेक्षकों एवं केन्द्राध्यक्षों का चयन रेंडमाइजेशन द्वारा किया गया। विद्यार्थियों की अंक-सूचियों में सुधार के लिये ऑनलाइन व्यवस्था लागू की गयी है। प्रवेश-पत्र के डाउनलोड और डुप्लीकेट अंक-सूची की सुविधा के लिये मोबाइल एप भी प्रारंभ किया गया है। इस प्रकार बोर्ड परीक्षाओं की प्रवेश सूची, परीक्षा आवेदन-पत्र, नामांकन, पुनर्गणना आदि गतिविधियाँ पूर्णत: ऑनलाइन हो गयी हैं। प्रदेश की सभी शालाओं की जीआईएस मेपिंग का कार्य भी पूरा कर लिया गया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के निर्धारित मापदण्डों के अनुसार पड़ोस की सीमा में प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं की अधिसूचना वर्ष 2013-14 में जारी की गयी। इस वर्ष युक्ति-युक्तकरण तथा नयी शालाओं के माध्यम से निर्धारित पड़ोस की सीमा में 100 प्रतिशत प्राथमिक तथा मिडिल शाला सुविधा उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत वर्ष 2001-02 से अब तक 17 हजार 851 प्राथमिक शालाओं का माध्यमिक शाला में उन्नयन किया गया है। इन शालाओं में 53 हजार 553 शिक्षक के पद स्वीकृत किये गये हैं। इसी तरह 27 हजार 910 एजूकेशन गारंटी स्कूल/सेटेलाइट शालाओं का प्राथमिक शालाओं में उन्नयन तथा नयी प्राथमिक शालाएँ खोली गयी हैं। इन शालाओं के लिये में 55 हजार 820 शिक्षक के पद स्वीकृत किये गये हैं। अधिनियम में शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये 26 हजार 26 मिडिल शिक्षक, 31 हजार 599 प्राथमिक शाला शिक्षक, 6383 प्रधानाध्यापक प्राथमिक, 5547 प्रधानाध्यापक मिडिल, 39 हजार 66 अंशकालिक अनुदेशक मिडिल के पद स्वीकृत किये जा चुके हैं। प्रायवेट स्कूल की प्रवेशित कक्षा में वंचित समूह एवं कमजोर वर्ग के बच्चों के लिये न्यूनतम 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित कर उन्हें प्रवेश दिलवाया गया। वर्ष 2011-12 से वर्ष 2014-15 तक 6 लाख से अधिक बच्चों को नि:शुल्क प्रवेश दिया गया। इनमें से गत वर्ष 1 लाख 78 हजार वंचित समूह एवं कमजोर वर्ग के बच्चे लाभान्वित हुए। भारत सरकार द्वारा मध्यप्रदेश के इस मॉडल का अनुकरण करने के लिये सभी राज्य को पत्र लिखा गया। मुफ्त साइकिल/गणवेश वितरण गणवेश वितरण की योजना में कक्षा एक से 8 तक अध्ययनरत लगभग 87 लाख बच्चों को दो जोड़ी गणवेश के लिये 400 रुपये के मान से अकाउंट पेयी चेक के माध्यम से वितरण किया गया। पाँचवीं पास कर छठवीं में पड़ोस के गाँव की शालाओं में पढ़ने जाने वाले बालक-बालिका को नि:शुल्क साइकिल के लिये 2300 रुपये की राशि प्रति साइकिल दी जा रही है। गत वर्ष 3 लाख 6 हजार से अधिक बालक-बालिका को साइकिल वितरित की गयी। योजना से 37 प्रतिशत अनुसूचित-जनजाति एवं 17 प्रतिशत अनुसूचित-जाति के बच्चे लाभान्वित हुए। अनुसूचित-जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग की छोटी-छोटी बसाहटों की बालिकाओं को माध्यमिक स्तर की शिक्षा को पूर्ण करवाने के लिये 207 कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय एवं 324 बालिका छात्रावास से 50 हजार 625 बालिकाएँ लाभान्वित हो रही हैं। इन बालिकाओं के लिये यूनीसेफ के सहयोग से स्पोर्ट्स फॉर डेव्हलपमेंट योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों के बेघर अनाथ बच्चों के लिये 15 नये 100 सीटर आवासीय छात्रावास स्वीकृत किये गये हैं। इनसे सालाना शहरी क्षेत्र के लगभग 1500 बेघर, अनाथ एवं शाला से बाहर बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। विकलांग बच्चों के लिये 58 छात्रावास संचालित किये जा रहे हैं। बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें आवश्यक उपकरण प्रदाय किये जा रहे हैं। दृष्टि-बाधित बच्चों के लिये कक्षा एक से आठ की पुस्तकें ब्रेल लिपि में वितरित की जा रही है। शासकीय विद्यालयों, पंजीकृत मदरसों एवं संस्कृत शालाओं में कक्षा एक से आठ तक अध्ययनरत 90 लाख बच्चों को प्रतिवर्ष नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकें उपलब्ध करवायी जा रही हैं। शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में लायब्रेरी की स्थापना की गयी है। कक्षा 6 से 8 में अध्ययनरत सामान्य निर्धन वर्ग के छात्र-छात्राओं को, जिनके पालकों की वार्षिक आय 54 हजार से कम है, उन्हें राज्य मद से छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। प्रतिभा पर्व शिक्षा की गुणवत्ता को केन्द्र में रखते हुए शैक्षणिक उपलब्धियों एवं शालेय व्यवस्थाओं के सही मूल्यांकन के लिये प्रतिभा पर्व आयोजित किया जाता है। प्रतिभा पर्व का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता की सही-सही स्थिति ज्ञात करना, बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धियों के प्रति शासन की प्रतिबद्धता एवं प्राथमिकता दर्शाना, बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धियों में सुधार के लिये कार्यक्रम तथा रणनीति निर्धारित करना, बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धियों के प्रति शिक्षकों, शिक्षा प्रशासन एवं जन-प्रतिनिधियों को उत्तरदायी बनाना आदि शामिल है। शालाओं के समग्र रूप से मूल्यांकन के लिये दमोह एवं उमरिया जिले में लागू शाला दर्पण योजना को पूरे प्रदेश में विस्तार किया जा रहा है। ई-गवर्नेंस ई-गवर्नेंस के माध्यम से मॉनीटरिंग तंत्र का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। शिक्षकों एवं कर्मचारियों की वेतन संबंधी जानकारी को कम्प्यूटराइज्ड कर 'यूनिक कोड'' आवंटित किया गया है। शिक्षकों की समस्याओं एवं शिकायतों का ऑनलाइन पंजीयन एवं निराकरण की मॉनीटरिंग की व्यवस्था भी की गई है। शाला से बाहर बच्चों की बालक-बालिकावार ट्रेकिंग के लिए उनकी जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध करवाकर फालोअप करने की व्यवस्था की गई है। शिक्षकों को बच्चों की उपलब्धि स्तर के प्रति उत्तरदायी बनाने के लिए पोर्टल पर व्यवस्था की गई है। शिक्षा संबंधी योजनाओं एवं शिकायतों के लिए टेली-समाधान योजना लागू की गई है, जिसका टोल फ्री नंबर 155343 है। एजुकेशन पोर्टल को भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा शिक्षा क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ ई-गर्वनेंस कार्य हेतु स्वर्ण पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। विद्यालय उपहार योजना विद्यालयों के विकास के लिए विद्यालय उपहार योजना लागू की गई है। योजना का उद्देश्य, विद्यालयों को वस्तुरूप सहायता उपलब्ध करवाना तथा विद्यालयों का अधोसंरचनात्मक एवं अकादमिक विकास करना है। पोर्टल पर विद्यालय, अपनी शाला की प्रमुख आवश्यकताओं को चिन्हित कर, प्राथमिकता के क्रम में सूचीबद्ध करेंगे। कोई भी व्यक्ति, समूह, कम्पनी, ट्रस्ट या दानदाता अपनी इच्छा अनुसार विद्यालयों को शुद्ध पेयजल व्यवस्था, पंखें, सौर ऊर्जा उपकरण, शिक्षण सहायक सामग्री, कम्प्यूटर, प्रयोगशाला उपकरण, फर्नीचर, खेल-सामग्री, बाउंड्री, फेंसिंग आदि वस्तु उपहार में दे सकेंगे। प्रदेश की समस्त शालाओं की जीआईएस मेपिंग की जा रही है। सभी 51 जिलों में 1 लाख 21 हजार शालाओं की मेपिंग का कार्य पूर्ण कर लिया गया है।
अभियान का मुख्य उद्देश्य शैक्षिक गुणवत्ता के साथ ही शिक्षक एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति, गुणवत्तायुक्त अध्यापन और शालाओं के समग्र मूल्यांकन के लिये प्रतिभा-पर्व और पुस्तकोत्सव जैसे आयोजन हैं। स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा उनकी कमी की पूर्ति के लिये पिछले शैक्षिक सत्र में 42 हजार 88 संविदा शाला शिक्षक की नियुक्ति ऑनलाइन पद्धति और पारदर्शिता से की गयी। अभी लगभग 39 हजार अतिरिक्त संविदा शाला शिक्षक की नियुक्ति की कार्यवाही चल रही है। बच्चों द्वारा सीखने की प्रक्रिया की समझ बढ़ाने के लिये शिक्षक प्रशिक्षकों को हैदराबाद में प्रशिक्षण दिलवाया गया। शिक्षकों के क्षमता संवर्द्धन के लिये लखनऊ एवं इंदौर के आईआईएम तथा मसूरी के एलबीएसएनएए जैसे संस्थान में प्रशिक्षण आयोजित किये गये। शिक्षा में सुधार की दृष्टि से जिले में अकादमिक गुणवत्ता सुधार योजना लागू की गयी। इसके लिये 16 हजार से ज्यादा प्राथमिक शाला में गतिविधि आधारित शिक्षण तथा 14 हजार 280 माध्यमिक शाला में सक्रिय अधिगम प्रविधि कार्यक्रम चलाया गया। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के संदर्भ में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की व्यवस्था लागू की गयी है। शिक्षकों को सेवाकालीन प्रशिक्षण के लिये आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण की व्यवस्था है। इसके लिये फीडबेक, सर्वेक्षण आदि के आधार पर चिन्हांकित कठिन अवधारणाओं के मोनोग्राफ विकसित किये गये हैं। विद्यार्थियों की उत्तर-पुस्तिकाओं की जाँच और त्रुटि-सुधार पर शिक्षकों द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुसार मध्यप्रदेश की शालाओं में बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय बनाये जा रहे हैं। लगभग 58 हजार शौचालय के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। भारत सरकार के विभिन्न सार्वजनिक उपक्रम द्वारा लगभग 20 हजार शौचालय के निर्माण में सहभागिता की जा रही है। शेष का निर्माण भी सांसद, विधायक एवं राज्य तथा केन्द्र के उपक्रमों के सहयोग से किया जायेगा। प्रदेश में कुल एक लाख 21 हजार 693 शाला हैं। प्रदेश में इस साल 484 हाई स्कूल खोले जायेंगे। सरकार ने 201 विकासखण्ड में छठवीं से बारहवीं तक के लिये मॉडल स्कूल स्वीकृत किये हैं। स्वीकृत स्कूलों के लिये पदों की पूर्ति की जा रही है। राष्ट्रीय माध्यमिक शाला अभियान एवं मॉडल स्कूलों के अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिये 1700 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गयी है। इसके अलावा अपूर्ण कार्यों को पूरा करने के लिये माध्यमिक शिक्षा मण्डल एवं ओपन स्कूल को 50-50 करोड़ और संस्कृत बोर्ड को 44 करोड़ स्वीकृत किये गये हैं। गुणवत्ता सुधार के लिये ब्रिटिश काउंसिल द्वारा उज्जैन संभाग एवं सीहोर की प्राथमिक शालाओं के 24 हजार शिक्षक को अंग्रेजी भाषा का प्रशिक्षण दिया गया है। एनआईडी अहमदाबाद द्वारा पाठ्य-पुस्तकों की री-डिजायनिंग का कार्य किया गया है। एक परिसर के समस्त विद्यालय का एकीकरण कर शालाओं के डाइस कोड पूर्ववत रखे गये हैं। प्रदेश में 9 विभाग की 30 प्रकार की छात्रवृत्ति को ऑनलाइन स्वीकृत कर वितरित करने का बहुत बड़ा कार्य हाथ में लिया गया है। समग्र छात्रवृत्ति योजना में अब तक एक करोड़ 64 लाख 78 हजार 956 (103.70 प्रतिशत) विद्यार्थियों की मेपिंग कर 76 लाख 5 हजार 247 (102.34 प्रतिशत) की छात्रवृत्ति स्वीकृत की गयी है। शिक्षकों की ई-अटेंडेंस एप्लीकेशन योजना इंदौर संभाग में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस एप्लीकेशन योजना की सफलता को देखते हुए इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है। विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति प्रोत्साहित करने की इंस्पायर अवार्ड योजना में चयनित पाँच विद्यार्थी ने जापान का शैक्षणिक भ्रमण किया है। स्कूली शिक्षा में पारदर्शिता अपनाते हुए पदोन्नति बाद नियुक्ति, संविदा भर्ती एवं संविलियन की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है। स्कूलों की मान्यता की पूरी कार्यवाही इस साल से ऑनलाइन की जा रही है। बोर्ड परीक्षाओं के पर्यवेक्षकों एवं केन्द्राध्यक्षों का चयन रेंडमाइजेशन द्वारा किया गया। विद्यार्थियों की अंक-सूचियों में सुधार के लिये ऑनलाइन व्यवस्था लागू की गयी है। प्रवेश-पत्र के डाउनलोड और डुप्लीकेट अंक-सूची की सुविधा के लिये मोबाइल एप भी प्रारंभ किया गया है। इस प्रकार बोर्ड परीक्षाओं की प्रवेश सूची, परीक्षा आवेदन-पत्र, नामांकन, पुनर्गणना आदि गतिविधियाँ पूर्णत: ऑनलाइन हो गयी हैं। प्रदेश की सभी शालाओं की जीआईएस मेपिंग का कार्य भी पूरा कर लिया गया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के निर्धारित मापदण्डों के अनुसार पड़ोस की सीमा में प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं की अधिसूचना वर्ष 2013-14 में जारी की गयी। इस वर्ष युक्ति-युक्तकरण तथा नयी शालाओं के माध्यम से निर्धारित पड़ोस की सीमा में 100 प्रतिशत प्राथमिक तथा मिडिल शाला सुविधा उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत वर्ष 2001-02 से अब तक 17 हजार 851 प्राथमिक शालाओं का माध्यमिक शाला में उन्नयन किया गया है। इन शालाओं में 53 हजार 553 शिक्षक के पद स्वीकृत किये गये हैं। इसी तरह 27 हजार 910 एजूकेशन गारंटी स्कूल/सेटेलाइट शालाओं का प्राथमिक शालाओं में उन्नयन तथा नयी प्राथमिक शालाएँ खोली गयी हैं। इन शालाओं के लिये में 55 हजार 820 शिक्षक के पद स्वीकृत किये गये हैं। अधिनियम में शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये 26 हजार 26 मिडिल शिक्षक, 31 हजार 599 प्राथमिक शाला शिक्षक, 6383 प्रधानाध्यापक प्राथमिक, 5547 प्रधानाध्यापक मिडिल, 39 हजार 66 अंशकालिक अनुदेशक मिडिल के पद स्वीकृत किये जा चुके हैं। प्रायवेट स्कूल की प्रवेशित कक्षा में वंचित समूह एवं कमजोर वर्ग के बच्चों के लिये न्यूनतम 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित कर उन्हें प्रवेश दिलवाया गया। वर्ष 2011-12 से वर्ष 2014-15 तक 6 लाख से अधिक बच्चों को नि:शुल्क प्रवेश दिया गया। इनमें से गत वर्ष 1 लाख 78 हजार वंचित समूह एवं कमजोर वर्ग के बच्चे लाभान्वित हुए। भारत सरकार द्वारा मध्यप्रदेश के इस मॉडल का अनुकरण करने के लिये सभी राज्य को पत्र लिखा गया। मुफ्त साइकिल/गणवेश वितरण गणवेश वितरण की योजना में कक्षा एक से 8 तक अध्ययनरत लगभग 87 लाख बच्चों को दो जोड़ी गणवेश के लिये 400 रुपये के मान से अकाउंट पेयी चेक के माध्यम से वितरण किया गया। पाँचवीं पास कर छठवीं में पड़ोस के गाँव की शालाओं में पढ़ने जाने वाले बालक-बालिका को नि:शुल्क साइकिल के लिये 2300 रुपये की राशि प्रति साइकिल दी जा रही है। गत वर्ष 3 लाख 6 हजार से अधिक बालक-बालिका को साइकिल वितरित की गयी। योजना से 37 प्रतिशत अनुसूचित-जनजाति एवं 17 प्रतिशत अनुसूचित-जाति के बच्चे लाभान्वित हुए। अनुसूचित-जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग की छोटी-छोटी बसाहटों की बालिकाओं को माध्यमिक स्तर की शिक्षा को पूर्ण करवाने के लिये 207 कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय एवं 324 बालिका छात्रावास से 50 हजार 625 बालिकाएँ लाभान्वित हो रही हैं। इन बालिकाओं के लिये यूनीसेफ के सहयोग से स्पोर्ट्स फॉर डेव्हलपमेंट योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों के बेघर अनाथ बच्चों के लिये 15 नये 100 सीटर आवासीय छात्रावास स्वीकृत किये गये हैं। इनसे सालाना शहरी क्षेत्र के लगभग 1500 बेघर, अनाथ एवं शाला से बाहर बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। विकलांग बच्चों के लिये 58 छात्रावास संचालित किये जा रहे हैं। बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें आवश्यक उपकरण प्रदाय किये जा रहे हैं। दृष्टि-बाधित बच्चों के लिये कक्षा एक से आठ की पुस्तकें ब्रेल लिपि में वितरित की जा रही है। शासकीय विद्यालयों, पंजीकृत मदरसों एवं संस्कृत शालाओं में कक्षा एक से आठ तक अध्ययनरत 90 लाख बच्चों को प्रतिवर्ष नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकें उपलब्ध करवायी जा रही हैं। शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में लायब्रेरी की स्थापना की गयी है। कक्षा 6 से 8 में अध्ययनरत सामान्य निर्धन वर्ग के छात्र-छात्राओं को, जिनके पालकों की वार्षिक आय 54 हजार से कम है, उन्हें राज्य मद से छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। प्रतिभा पर्व शिक्षा की गुणवत्ता को केन्द्र में रखते हुए शैक्षणिक उपलब्धियों एवं शालेय व्यवस्थाओं के सही मूल्यांकन के लिये प्रतिभा पर्व आयोजित किया जाता है। प्रतिभा पर्व का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता की सही-सही स्थिति ज्ञात करना, बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धियों के प्रति शासन की प्रतिबद्धता एवं प्राथमिकता दर्शाना, बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धियों में सुधार के लिये कार्यक्रम तथा रणनीति निर्धारित करना, बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धियों के प्रति शिक्षकों, शिक्षा प्रशासन एवं जन-प्रतिनिधियों को उत्तरदायी बनाना आदि शामिल है। शालाओं के समग्र रूप से मूल्यांकन के लिये दमोह एवं उमरिया जिले में लागू शाला दर्पण योजना को पूरे प्रदेश में विस्तार किया जा रहा है। ई-गवर्नेंस ई-गवर्नेंस के माध्यम से मॉनीटरिंग तंत्र का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। शिक्षकों एवं कर्मचारियों की वेतन संबंधी जानकारी को कम्प्यूटराइज्ड कर 'यूनिक कोड'' आवंटित किया गया है। शिक्षकों की समस्याओं एवं शिकायतों का ऑनलाइन पंजीयन एवं निराकरण की मॉनीटरिंग की व्यवस्था भी की गई है। शाला से बाहर बच्चों की बालक-बालिकावार ट्रेकिंग के लिए उनकी जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध करवाकर फालोअप करने की व्यवस्था की गई है। शिक्षकों को बच्चों की उपलब्धि स्तर के प्रति उत्तरदायी बनाने के लिए पोर्टल पर व्यवस्था की गई है। शिक्षा संबंधी योजनाओं एवं शिकायतों के लिए टेली-समाधान योजना लागू की गई है, जिसका टोल फ्री नंबर 155343 है। एजुकेशन पोर्टल को भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा शिक्षा क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ ई-गर्वनेंस कार्य हेतु स्वर्ण पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। विद्यालय उपहार योजना विद्यालयों के विकास के लिए विद्यालय उपहार योजना लागू की गई है। योजना का उद्देश्य, विद्यालयों को वस्तुरूप सहायता उपलब्ध करवाना तथा विद्यालयों का अधोसंरचनात्मक एवं अकादमिक विकास करना है। पोर्टल पर विद्यालय, अपनी शाला की प्रमुख आवश्यकताओं को चिन्हित कर, प्राथमिकता के क्रम में सूचीबद्ध करेंगे। कोई भी व्यक्ति, समूह, कम्पनी, ट्रस्ट या दानदाता अपनी इच्छा अनुसार विद्यालयों को शुद्ध पेयजल व्यवस्था, पंखें, सौर ऊर्जा उपकरण, शिक्षण सहायक सामग्री, कम्प्यूटर, प्रयोगशाला उपकरण, फर्नीचर, खेल-सामग्री, बाउंड्री, फेंसिंग आदि वस्तु उपहार में दे सकेंगे। प्रदेश की समस्त शालाओं की जीआईएस मेपिंग की जा रही है। सभी 51 जिलों में 1 लाख 21 हजार शालाओं की मेपिंग का कार्य पूर्ण कर लिया गया है।

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